दिल्ली विश्वविद्यालय : नार्थ दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हंसराज कॉलेज में आयोजित वार्षिक उत्सव के दौरान छात्रों में कथित हिंसा का मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। आपको बता दें कॉलेज प्रशासन की शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने 21 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिनमें 17 छात्र और चार बाहरी व्यक्ति शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद परिसर में तनाव का माहौल बना हुआ है और कई छात्र प्रशासन के फैसले के खिलाफ खुलकर विरोध कर रहे हैं।

वार्षिकोत्सव में क्या हुआ था?
अब समझते हैं वार्षिकोत्सव में क्या हुआ था आपको बता दें हंसराज कॉलेज प्रशासन के अनुसार, 9 अप्रैल को आयोजित वार्षिकोत्सव के दौरान स्थिति अचानक बिगड़ गई। आरोप यह लगाया गया है कि करीब 50 से 60 लोगों का एक समूह, जिसमें कुछ बाहरी लोग भी शामिल थे, वह सभी लोग बिना अनुमति के परिसर में दाखिल हुआ।
शिकायत में कहा गया है कि यह समूह न केवल अवैध तरीके से इकट्ठा हुआ बल्कि उनके पास धारदार हथियार भी थे। इसी दौरान एक छात्र पर गंभीर हमला किया गया, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गया और उसे तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ी।
पुलिस कार्रवाई और FIR का विवरण
आपको बता दें दिल्ली पुलिस ने कॉलेज प्रशासन की शिकायत के आधार पर 21 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इनमें 17 हंसराज कॉलेज के छात्र और चार बाहरी लोग शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, नामजद छात्रों में चार छात्रसंघ पदाधिकारी भी हैं। फिलहाल उन्हें जांच में सहयोग के लिए बुलाया गया है, जबकि अन्य छात्रों से भी पूछताछ की प्रक्रिया जारी है।
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पहले भी हो चुकी है अनुशासनात्मक कार्रवाई
आपको बता दें इससे पहले भी अनुशासनात्मक कार्यवाई हो चुकी थी इस घटना के बाद कॉलेज प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए करीब 30 छात्रों को निलंबित कर दिया था। इनमें वे छात्र भी शामिल थे जिन पर सीधे तौर पर झड़प में शामिल होने का आरोप है, और कुछ छात्रसंघ पदाधिकारी भी, जिन पर भीड़ प्रबंधन में विफल रहने का आरोप लगाया गया।
कॉलेज ने एक अनुशासनात्मक समिति का गठन कर मामले की जांच की, जिसमें CCTV फुटेज की गहन समीक्षा भी की गई। जांच के आधार पर प्रशासन ने यह कार्रवाई की।
कलाकार को बुलाने पर मतभेद
अब समझते हैं इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में वार्षिकोत्सव से पहले शुरू हुआ एक विवाद भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार, एक कलाकार को कार्यक्रम में बुलाने को लेकर कॉलेज प्रशासन और छात्रसंघ के बीच मतभेद हो गया था।
प्रशासन ने पहले सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। बाद में शर्तों के साथ अनुमति दी गई, जिसमें भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी छात्रसंघ को सौंपी गई थी।
हालांकि, कार्यक्रम के दौरान स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई और विभिन्न कॉलेजों के छात्रों के बीच झड़प की घटनाएं सामने आईं।
छात्रों का विरोध और आरोप
आपको बता दें FIR और निलंबन के खिलाफ छात्रों का गुस्सा भी सामने आया है। कई छात्रों ने कॉलेज के गेट के बाहर प्रदर्शन करते हुए प्रशासन से अपने फैसले वापस लेने की मांग की।
कुछ छात्रों का आरोप है कि कार्रवाई एकतरफा है और यह परिसर की लोकतांत्रिक व्यवस्था के पूरी तरह से खिलाफ है। एक छात्रा ने यह भी दावा किया कि कॉलेज प्रशासन की ओर से अनुचित टिप्पणियां की गईं, हालांकि पुलिस प्रशासन ने लगाए गए इन आरोपों को खारिज किया है।
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कॉलेज प्रशासन का पक्ष
अब इस मामले में हंसराज कॉलेज की प्रिंसिपल ने साफ किया है कि संस्थान हिंसा के मामलों में “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाता है। उनका कहना है कि छात्रों को विरोध और असहमति का अधिकार है, लेकिन हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
प्रशासन का यह भी कहना है कि जब हालात बिगड़े तो आवश्यक कार्रवाई की गई और पुलिस में शिकायत दर्ज कराना जरूरी था।
व्यापक संदर्भ और आगे की स्थिति
दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में बड़े आयोजनों के दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन हमेशा एक चुनौती रहा है। यह घटना एक बार फिर इस मुद्दे को उजागर करती है कि प्रशासन, छात्रसंघ और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है।
फिलहाल, आपको बता दें इस मामले की जाँच पुलिस टीम द्वारा जारी है और आने वाले दिनों में कई और भी खुलासे हो सकते हैं।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज का यह मामला केवल एक कॉलेज परिसर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शैक्षणिक तंत्र में सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा करता है। जहां एक तरफ प्रशासन सख्त कार्रवाई की बात कर रहा है, वहीं छात्र इसे अपने अधिकारों के खिलाफ मान रहे हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि जांच के निष्कर्ष क्या निकलते हैं और क्या दोनों पक्षों के बीच कोई संतुलित समाधान निकल पाता है या नहीं।
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