ईरान की सत्ता में हालिया बदलाव के बाद ईरान की विदेश और रक्षा नीति को लेकर बड़ा संदेश सामने आया है। आपको बता दें ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने साफ कर दिया है कि ईरान अपनी परमाणु और मिसाइल क्षमताओं पर किसी भी तरह का कोई समझौता नहीं करेगा।

सुप्रीम लीडर का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है थमने का नाम नहीं ले रहा है।

परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर अडिग रुख

आपको बता दें ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपने हालिया बयान में देश की रक्षा क्षमताओं को “राष्ट्रीय संपत्ति” बताते हुए स्पष्ट कर दिया कि इन पर कोई सौदेबाजी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि ईरान की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति—जिसमें परमाणु तकनीक, मिसाइल सिस्टम, नैनो टेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी शामिल हैं—देश की संप्रभुता का अहम हिस्सा हैं।

उनके अनुसार, इन क्षमताओं की सुरक्षा उसी तरह की जाएगी जैसे देश अपनी सीमाओं—जल, थल और आकाश—की रक्षा करता है। यह बयान सीधे तौर पर अमेरिका की उन कोशिशों के जवाब में देखा जा रहा है, जिनमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण की मांग की जाती रही है।

सत्ता परिवर्तन के बाद पहली बड़ी प्रतिक्रिया

ईरान में सत्ता परिवर्तन के बाद ईरान की तरफ से एक बड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है गौरतलब है कि मोजतबा खामेनेई ने सत्ता उस समय संभाली जब उनके पिता अली खामेनेई की इजराइल मिसाइल हमले में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद से वह सार्वजनिक मंचों पर कम नजर आए हैं, लेकिन उनके लिखित संदेश लगातार ईरान की नीतियों को दिशा दे रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान उनके नेतृत्व की दिशा और प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है जहां राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च महत्व दिया जा रहा है।

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फारस की खाड़ी को लेकर अमेरिका को चेतावनी

आपको बता दें अपने बयान में खामेनेई ने फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र पर ईरान का पूर्ण नियंत्रण है और यहां बाहरी शक्तियों की कोई जरूरत नहीं है।

उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि इस क्षेत्र में अमेरिकियों की मौजूदगी अस्वीकार्य है और उनका “एकमात्र स्थान” समुद्र की गहराइयों में हो सकता है। यह बयान सीधे तौर पर अमेरिका की सैन्य उपस्थिति को चुनौती देने वाला माना जा रहा है।

क्षेत्रीय भविष्य पर ईरान का दृष्टिकोण

आपको बता दें मोजतबा खामेनेई ने यह भी कहा कि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी से जुड़े देशों का भविष्य बाहरी हस्तक्षेप के बिना अधिक सुरक्षित और समृद्ध होगा। ईरान ने क्षेत्रीय सहयोग पर जोर देते हुए कहा कि पड़ोसी देशों को मिलकर विकास और स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

उनका कहना था कि हजारों किलोमीटर दूर से आने वाली शक्तियां केवल अपने स्वार्थ के लिए हस्तक्षेप करती हैं, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता पैदा होती है।

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बढ़ता वैश्विक तनाव और संभावित असर

ईरान के सुप्रीम लीडर और अमेरिका के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंध रहे हैं, लेकिन यह नया बयान दोनों देशों के बीच टकराव को और बढ़ा सकता है। खासकर परमाणु कार्यक्रम और रणनीतिक जलमार्गों को लेकर जारी खींचतान वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

कुछ महत्वपूर्ण विश्लेषकों के अनुसार, यदि इस तरह के कड़े बयान जारी रहते हैं, तो आने वाले समय में कूटनीतिक समाधान और भी कठिन हो सकता है।

मोजतबा खामेनेई का यह बयान साफ संकेत देता है कि ईरान अपनी रक्षा और तकनीकी क्षमताओं पर किसी भी बाहरी दबाव को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। साथ ही, अमेरिका को दी गई सीधी चेतावनी यह दर्शाती है कि आने वाले समय में मध्य पूर्व की राजनीति और भी संवेदनशील और जटिल हो सकती है।

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