निगरानी के साथ आत्मनिर्भरता:- भारत अपनी रक्षा तकनीक को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विशेष रूप से हाइपरसोनिक हथियारों के क्षेत्र में देश ने महत्वपूर्ण प्रगति की है।

हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation) के प्रमुख Samir V. Kamat ने बताया कि भारत की लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप मिसाइल (LR-AShM) अब उन्नत चरण में पहुंच चुकी है और इसके शुरुआती परीक्षण जल्द किए जा सकते हैं।

तटीय सुरक्षा के लिए खास डिजाइन

इस मिसाइल को भारतीय नौसेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य समुद्र में मौजूद दुश्मन के जहाजों और गतिशील लक्ष्यों को सटीकता से निशाना बनाना है। इसमें स्वदेशी एवियोनिक्स और आधुनिक सेंसर तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे इसकी लक्ष्यभेदी क्षमता काफी बेहतर हो जाती है।

रफ्तार और मारक क्षमता

LR-AShM की सबसे बड़ी ताकत इसकी तेज गति और लंबी दूरी है। यह मिसाइल अधिकतम मैक 10 (करीब 12,000 किमी/घंटा) की गति हासिल कर सकती है, जबकि औसतन मैक 5 से अधिक की रफ्तार बनाए रखती है। इसकी मारक क्षमता लगभग 1500 किलोमीटर तक मानी जा रही है, जिससे यह दुश्मन को प्रतिक्रिया देने का बहुत कम समय देती है।

पारंपरिक मिसाइलों से अलग तकनीक

यह हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों से अलग तरीके से काम करती है। यह सीधी दिशा में उड़ान नहीं भरती, बल्कि क्वासी-बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी का पालन करते हुए रास्ते में कई बार दिशा बदल सकती है। कम ऊंचाई पर उड़ान और लगातार मार्ग परिवर्तन की वजह से इसे ट्रैक करना रडार सिस्टम के लिए कठिन हो जाता है।

दो चरणों में काम करने वाली प्रणाली

इस मिसाइल में दो-स्टेज सॉलिड प्रोपल्शन सिस्टम का उपयोग किया गया है। पहले चरण में बूस्टर इसे प्रारंभिक गति देता है। इसके अलग होने के बाद दूसरा चरण मिसाइल को हाइपरसोनिक गति तक पहुंचाता है। इसके बाद यह बिना इंजन के ग्लाइड करते हुए लक्ष्य की ओर बढ़ती है और अंतिम चरण में सटीक वार करती है।

हाइपरसोनिक ग्लाइड और क्रूज मिसाइल में अंतर

Samir V. Kamat के अनुसार, हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में स्क्रैमजेट इंजन होता है, जो पूरी उड़ान के दौरान उन्हें शक्ति प्रदान करता है। इसके विपरीत, हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइलें बूस्टर से गति प्राप्त करने के बाद बिना इंजन के ग्लाइड करती हैं। वर्तमान में भारत का ग्लाइड मिसाइल कार्यक्रम अधिक उन्नत स्थिति में है।

भविष्य की मिसाइल फोर्स पर काम

भारत एक व्यापक कन्वेंशनल मिसाइल फोर्स विकसित करने की दिशा में भी काम कर रहा है। इसमें विभिन्न रेंज और रणनीतिक जरूरतों के अनुसार शॉर्ट, मीडियम और लंबी दूरी की बैलिस्टिक, क्रूज और हाइपरसोनिक मिसाइलों को शामिल किया जाएगा।

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प्रलय मिसाइल अंतिम परीक्षण चरण में

शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल Pralay Missile अब अपने अंतिम परीक्षण चरण में है। इसके जल्द ही सेना में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

भारत की हालिया उपलब्धियां

भारत ने हाइपरसोनिक तकनीक के क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्ष 2020 में HSTDV का सफल परीक्षण किया गया था, जिससे स्क्रैमजेट तकनीक की क्षमता सिद्ध हुई। इसके बाद लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइलों के परीक्षण और स्क्रैमजेट इंजन से जुड़े ग्राउंड परीक्षणों ने भारत की तकनीकी क्षमता को और मजबूत किया है।

निष्कर्ष

भारत का हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम देश की रक्षा क्षमता को नई दिशा देने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता को भी मजबूत कर रहा है। LR-AShM जैसी उन्नत मिसाइलें भविष्य में भारत की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक ताकत को और अधिक सुदृढ़ बनाएंगी।