US-Iran Ceasefire : 40 दिनों की इस जंग के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम हो चूका है लेकिन अभी यह समझोता अस्थायी है वहीँ आपको बता दें इस संघर्षविराम के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक इंटरव्यू में कई अहम मुद्दों पर खुलकर बात की। आपको बता दें इस बातचीत में उन्होंने न केवल इस समझौते को “पूरी जीत” बताया, बल्कि चीन की भूमिका, परमाणु मुद्दे और संभावित भविष्य के संघर्ष पर भी महत्वपूर्ण संकेत दिए।

US-Iran Ceasefire: Trump's big claims in interview, endorses China's role and hints at future war

संघर्षविराम के बाद ट्रंप का पहला बड़ा इंटरव्यू

संघर्षविराम की घोषणा के बाद दिए गए इंटरव्यू में राष्ट्रपति ट्रंप से कई सीधे और महत्वपूर्ण सवाल पूछे गए। पूछे गए उनके जवाबों ने यह साफ कर दिया कि अमेरिका इस समझौते को अपनी रणनीतिक सफलता मान रहा है, लेकिन कई मुद्दों पर अनिश्चितता अभी भी बरकरार है।

“100 प्रतिशत जीत” का दावा

आपको बता दें युद्ध ख़त्म होने के बाद जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह इस समझौते को अपनी जीत मानते हैं, तो उन्होंने बिना किसी झिझक के इसे पूरी तरह अमेरिका की जीत बताया।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह “पूर्ण और स्पष्ट जीत” है और इसमें किसी भी तरह का संदेह नहीं है। उनके इस बयान से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका इस समझौते को अपनी कूटनीतिक ताकत का परिणाम मान रहा है।

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होर्मुज और अन्य मुद्दों पर बातचीत जारी

अभी फ़िलहाल हालांकि संघर्षविराम लागू हो चुका है, लेकिन कई कैसे ऐसे और अहम मुद्दों हैं जिन पर चर्चा अभी भी चर्चा जारी है।

आपको बता दें ट्रंप के अनुसार, दोनों देशों के बीच लगभग 15 प्रमुख बिंदुओं पर बातचीत हो रही है। इनमें से कई पर सहमति बन चुकी है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण विषय—जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य—अब भी बातचीत के दायरे में हैं।

भविष्य को लेकर अनिश्चितता बरकरार

डोनाल्ड ट्रम्प के इस इंटरव्यू में सबसे अहम सवाल यह रहा कि अगर आने वाले दिनों में यह समझौता आगे नहीं बढ़ता, तो क्या फिर से तनाव बढ़ सकता है।

इस पर ट्रंप ने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा कि भविष्य में क्या होगा, यह समय के साथ सामने आएगा। उनके इस बयान ने यह संकेत दिया कि स्थिति अभी पूरी तरह स्थिर नहीं है।

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चीन की भूमिका को लेकर पुष्टि

आपको बता दें इस पूरे घटनाक्रम में China की भूमिका भी बहुत अहम साबित हुई हैं चीन को लेकर लंबे समय से चर्चा हो रही थी। इंटरव्यू में ट्रंप ने स्वीकार किया कि चीन ने ईरान को बातचीत के लिए राजी करने में भूमिका निभाई।

यह बयान वैश्विक कूटनीति में चीन के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है, खासकर ऐसे संवेदनशील मामलों में जहां कई देशों की भागीदारी होती है।

परमाणु मुद्दे पर सख्त रुख

आपको बता दें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी ट्रंप ने सख्त रुख दिखाया। और उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को पूरी तरह नियंत्रित किया जाएगा और यदि ऐसा संभव नहीं होता, तो वह इस समझौते को स्वीकार ही नहीं करेंगे।

हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस दिशा में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।

क्यों अहम है यह इंटरव्यू

संघर्षविराम के बाद यह इंटरव्यू सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि आने वाले समय की नीति का संकेत भी है। इससे यह समझ आता है कि अमेरिका इस समझौते को किस नजरिये से देख रहा है और भविष्य में उसकी रणनीति क्या हो सकती है।

साथ ही, यह भी स्पष्ट होता है कि संघर्षविराम के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत अभी बाकी है।

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निष्कर्ष

अमेरिका और ईरान के बीच हुआ यह संघर्षविराम फिलहाल राहत जरूर देता है, लेकिन ट्रंप के इंटरव्यू से यह साफ हो गया है कि कई अहम सवाल अभी भी अनसुलझे हैं।

चीन की भूमिका, परमाणु मुद्दा और भविष्य में संभावित तनाव—ये सभी ऐसे कारक हैं जो आने वाले दिनों में इस समझौते की दिशा तय करेंगे। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि यह अस्थायी शांति स्थायी समाधान में बदलती है या नहीं।

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