Voter List Revision 2026 : देश में मतदाता सूचियों को अपडेट करने के लिए चलाए गए विशेष गहन संशोधन (SIR) अभियान के बाद बड़ा बदलाव सामने आया है। आपको बता दें नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में कुल मिलाकर 6 करोड़ से ज्यादा नाम अभी तक मतदाता सूची से हटाए गए हैं। आपको बता दें इस प्रक्रिया के बाद कुल मतदाताओं की संख्या में बहुत भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे चुनावी गणित और राजनीतिक रणनीतियों पर भी असर पड़ सकता है।

Voter List Revision 2026

बता दें कि चुनाव आयोग द्वारा चलाए गए SIR अभियान के तहत जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां संयुक्त मतदाता सूची में लगभग 6.08 करोड़ नाम कम हो गए हैं।

SIR से पहले इन क्षेत्रों में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 51 करोड़ थी, जो अब घटकर लगभग 44.92 करोड़ रह गई है। यह गिरावट पिछले कुछ महीनों में हुई व्यापक जांच और सत्यापन प्रक्रिया का परिणाम मानी जा रही है।

किन राज्यों में पूरी हुई प्रक्रिया

चल रहे इस SIR संशोधन अभियान का दूसरा चरण अब पूरी तरह से पूरा हो चुका है। जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अंतिम मतदाता सूची जारी की गई है, उनमें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, गुजरात, मध्य प्रदेश, गोवा के साथ-साथ पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप शामिल हैं।

इन सभी क्षेत्रों में मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए व्यापक स्तर पर डेटा जांच क्या गया है, और साथ ही सभी डुप्लीकेट नाम हटाने और मृत या स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान की गई।

यूपी और गुजरात में सबसे ज्यादा गिरावट

अगर प्रतिशत के आधार पर देखा जाए, तो गुजरात और उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मतदाता कम हुए हैं।

  • गुजरात: 13.40% कमी
  • उत्तर प्रदेश: 13.24% कमी
  • छत्तीसगढ़: 11.77%
  • पश्चिम बंगाल: 11.61%
  • तमिलनाडु: 11.55%
  • गोवा: 10.76%

इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और केरल जैसे राज्यों में भी मतदाताओ की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है जो कि एक बहुत गंभीर बात है।

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उत्तर प्रदेश: बड़े शहरों में सबसे ज्यादा असर

आपको दता दें उत्तर प्रदेश में इस SIR अभियान का सबसे ज्यादा असर बड़े शहरी जिलों में देखने को मिला।

प्रमुख जिले जहां सबसे ज्यादा नाम हटे:

  • लखनऊ: 9.14 लाख
  • प्रयागराज: 8.26 लाख
  • कानपुर: 6.87 लाख
  • आगरा: 6.37 लाख
  • गाजियाबाद: 5.74 लाख

विधानसभा क्षेत्रों में गिरावट:

  • साहिबाबाद: 3.16 लाख
  • नोएडा: 1.83 लाख
  • लखनऊ उत्तर: 1.54 लाख

आपको बता दें सबसे दिलचस्प बात यह है कि कई इलाकों में पुरुषों के साथ-साथ महिला मतदाताओं की संख्या में भी कमी देखी गई है।

पश्चिम बंगाल में भी बड़ी कटौती

वहीँ देखा जाए तो पश्चिम बंगाल में भी इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं।

आपको बता दें शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक करीब 63 लाख नाम अभी तक हटाए गए थे, लेकिन अंतिम जांच के बाद यह संख्या तेजी से बढ़कर लगभग 90 लाख तक पहुंच गई। इससे राज्य की कुल मतदाता संख्या में बड़ा बदलाव आया है।

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देशभर में क्या है स्थिति

भारत में कुल करीब 99 करोड़ मतदाता हैं। इनमें से लगभग 60 करोड़ मतदाता इस SIR अभियान के दायरे में आ चुके हैं।

बाकी 40 करोड़ मतदाताओं को अगले चरण में शामिल किया जाएगा, जो 17 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा। संभावना है कि आगामी विधानसभा चुनावों के बाद यह प्रक्रिया तेज की जाएगी।

क्यों जरूरी था SIR अभियान

विशेष गहन संशोधन (SIR) का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूचियों को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना है।

इस प्रक्रिया के तहत:

  • डुप्लीकेट नाम हटाए जाते हैं
  • मृत मतदाताओं को सूची से हटाया जाता है
  • स्थान बदल चुके लोगों की जानकारी अपडेट की जाती है

इससे चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने में मदद मिलती है।

SIR अभियान के बाद सामने आए आंकड़े बताते हैं कि देश की मतदाता सूची में बड़ा बदलाव हो रहा है। खासकर उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे बड़े राज्यों में भारी गिरावट राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

आने वाले समय में जब बाकी राज्यों में भी यह प्रक्रिया पूरी होगी, तब देश की चुनावी तस्वीर और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

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