फतेहाबाद में मासूम अभय का मर्डर मिस्ट्री:- आगरा के फतेहाबाद मैं एक दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है जहा नगर कॉलोनी में 8 साल के मासूम अभय प्रताप के अपहरण और हत्या की गुत्थी आखिरकार पुलिस ने सुलझा ली है। ये मामला जितना दर्दनाक है, उतना ही चौंकाने वाला भी। अभय का अपहरण 30 अप्रैल को हुआ था, लेकिन कुछ ही घंटों में उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। 80 दिनों की तलाश के बाद उसका शव राजस्थान के मनिया थाना क्षेत्र से बरामद किया गया। आईये आगे पड़ते है आखिर पूरी मर्डर मिस्ट्री किया थी

फिरौती के नाम पर खेली गई खौफनाक साजिश
अभय की हत्या के बावजूद आरोपी परिवार से 80 लाख रुपये की फिरौती की मांग करते रहे। जबकि अभय की हत्या हो चुकी थी परिजनों को चार अलग-अलग पत्र भेजे गए थे, जिनमें फिरौती की रकम मांगी गई। पुलिस के अनुसार, यह सोची-समझी साजिश थी जिसे करीब दो महीने पहले ही रचा गया था। अब जरा सोचिये की यह घटना कितनी दर्दनाक है की 8 साल के बच्चे का अपहरण कर उसकी हत्या तभी कर दी गयी और 80 दिन के बाद उसका शव बरामद किया गया किया बीती होगी उस परिवार पर जब उसके बच्चे का शव 80 दिन बाद बरामद हुआ किया बीती होगी उस परिवार पर जब उसके बेटे की बेहेरेमी से हत्या की गयी यह बोहोत ही शर्मशार करने वाली घटना आज कल लोगो को पेसो का इतना लालच हो गया है की उन्होंने एक बच्चे की जान को भी जान नहीं समझा।

पड़ोसियों ने ही किया मासूम का कत्ल
और आपको यह जानकर हेरानी होगी की इस दिल दहला देने वाली वारदात को अंजाम देने वाले कोई बाहरी नहीं, बल्कि मृतक के घर के बिल्कुल करीब रहने वाले दो युवक—कृष्णा उर्फ भजन लाल और राहुल—निकले। राहुल मृतक के घर के सामने ही रहता था, जबकि कृष्णा का जन सेवा केंद्र कुछ कदम की दूरी पर स्थित है।
पुलिस जांच में सामने आया कि कृष्णा लंबे समय से अभय को टॉफी देकर अपने साथ घुलाने की कोशिश कर रहा था। आरोपियों को पता था कि अभय के दादा ने हाल ही में जमीन बेची है और परिवार के पास पैसे हैं। इसी लालच में उन्होंने ये घिनौनी साजिश रची।

घटना का दिन: मासूम को बहला कर ले गए, रास्ते में कर दी हत्या
30 अप्रैल को कस्बे में एक शादी समारोह के दौरान आरोपियों ने अभय को बहला-फुसलाकर स्कूटी पर बैठा लिया। कुछ दूरी पर पहुंचते ही अभय रोने लगा और घर जाने की जिद करने लगा। इससे घबरा कर दोनों ने उसका गला दबा कर हत्या कर दी। शव को एक प्लास्टिक की बोरी में भरकर स्कूटी पर ही रखा और राजस्थान के मनिया क्षेत्र ले जाकर एक खेत में दबा दिया।

रोज़ की तरह सामान्य व्यवहार करते रहे आरोपी
हत्या करने के बाद दोनों आरोपी एक सामान्य जीवन जीते रहे। जेसे उन्होंने कोई गुनाह किया ही नहीं कृष्णा अपने जन सेवा केंद्र पर आता-जाता रहा और यहां तक कि पुलिस अधिकारियों से बातचीत भी करता रहा। दूसरी ओर, राहुल अपने वेल्डिंग के काम पर रोज़ाना जाता था। किसी को भी उन पर शक नहीं हुआ।

एक चूक से खुल गया राज़
परिजनों और पड़ोसियों ने जब फिरौती के पत्रों को गौर से पढ़ा तो उनमें प्रयुक्त कुछ शब्द और बोलचाल की शैली से संदेह गहराया। यह भाषा क्षेत्र में सिर्फ कृष्णा की बोलचाल से मेल खाती थी। यही सुराग पुलिस को आरोपियों तक ले गया। टेक्निकल सर्विलांस और लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर पुलिस राजस्थान के मनिया पहुंची, जहां एक खेत में जमीन के भीतर प्लास्टिक की बोरी में अभय का शव बरामद हुआ।

पुलिस के लिए भी एक इमोशनल केस
फतेहाबाद थाना पुलिस की कई टीमें दिन-रात इस केस पर लगी रहीं। लेकिन यह केस सिर्फ एक जाँच नहीं, एक संवेदनशील जिम्मेदारी बन गया था। 80 दिन तक परिवार हर दरवाज़ा खटखटाता रहा और अंततः पुलिस ने सच्चाई सामने ला दी।

निष्कर्ष:
यह मामला सिर्फ अपहरण या हत्या नहीं, बल्कि हमारे समाज की उस विडंबना को उजागर करता है, जहाँ लालच रिश्तों और भरोसे को भी निगल जाता है। अब जब आरोपी सलाखों के पीछे हैं, मासूम अभय को न्याय दिलाने की शुरुआत हुई है लेकिन कहीं एक सवाल अब भी बाकी है: क्या हम अपने बच्चों को वाकई सुरक्षित कह सकते हैं?
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