हरियाली तीज 2025:- भारतीय त्योहारों में हरियाली तीज एक विशेष स्थान रखती है। यह पर्व नारी शक्ति, सौंदर्य, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। खासकर विवाहित महिलाओं के लिए यह दिन अत्यंत पावन माना जाता है। हरियाली तीज शिव और पार्वती के पुनर्मिलन की स्मृति में मनाई जाती है और इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सौभाग्य के लिए व्रत रखती हैं।

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उत्तर भारत के राज्यों — राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और हरियाणा में यह पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। सावन मास की हरियाली से सराबोर यह तीज न केवल धार्मिक रूप से, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी बेहद खास होती है।

हरियाली तीज 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

हरियाली तीज हर साल श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह दिन विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है।

  • तिथि: सोमवार, 4 अगस्त 2025
  • तृतीया तिथि आरंभ: 4 अगस्त 2025, सुबह 2:47 बजे
  • तृतीया तिथि समाप्त: 5 अगस्त 2025, सुबह 4:35 बजे
  • पूजा का उत्तम समय (शुभ मुहूर्त): 4 अगस्त को दोपहर 12:20 बजे से 2:05 बजे तक

यह मुहूर्त विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना, कथा सुनने और व्रत के संकल्प के लिए उत्तम माना जाता है।

हरियाली तीज का महत्व

हरियाली तीज नारीत्व की शक्ति और उसके सामाजिक व धार्मिक दायित्वों का प्रतीक मानी जाती है। यह व्रत महिलाओं द्वारा पति की लंबी उम्र और पारिवारिक सुख-शांति के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता पार्वती ने घोर तपस्या के बाद भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। इसी उपलक्ष्य में यह पर्व मनाया जाता है।

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इस दिन सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, नए वस्त्र पहनती हैं, हाथों में मेहंदी लगाती हैं और झूले पर झूलते हुए तीज गीत गाती हैं। यह पर्व सावन की हरियाली में और भी रंग भर देता है।

हरियाली तीज की पूजा विधि

हरियाली तीज की पूजा विधि को परंपरा के अनुसार किया जाना अत्यंत शुभ होता है। नीचे हम इसकी संपूर्ण विधि बता रहे हैं:

1. व्रत का संकल्प

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके साफ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें। यह व्रत निर्जला (बिना पानी के) भी रखा जाता है, लेकिन यदि स्वास्थ्य कारणों से संभव न हो तो जल ले सकते हैं।

2. पूजन सामग्री की तैयारी

पूजा के लिए आवश्यक सामग्री में रोली, चावल, जल से भरा कलश, सुपारी, नारियल, फल, मिठाई, बेलपत्र, धूप, दीपक, फूल, और श्रृंगार की चीजें शामिल होती हैं। मिट्टी की शिव-पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर भी स्थापित करें।

3. माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा

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शुभ मुहूर्त में शिव-पार्वती का विधिवत पूजन करें। बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित करें और माता पार्वती को श्रृंगार अर्पित करें। दीपक जलाकर कथा का पाठ करें।

4. हरियाली तीज की कथा

पूजा के बाद हरियाली तीज की व्रत कथा का श्रवण करना अत्यंत आवश्यक होता है। यह कथा पार्वती जी की कठोर तपस्या और शिवजी से उनके विवाह की कथा पर आधारित होती है।

5. झूला झूलने की परंपरा

हरियाली तीज में झूला झूलना बहुत शुभ माना जाता है। महिलाएं गीत गाते हुए समूह में झूला झूलती हैं और सावन के गीतों से वातावरण को आनंदमय बनाती हैं।

6. व्रत का पारण

व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद जल ग्रहण करके किया जाता है। कुछ महिलाएं संध्या के समय पूजा के बाद भी व्रत खोलती हैं, लेकिन पारंपरिक रूप से यह व्रत पूर्ण निर्जला रखा जाता है।

हरियाली तीज से जुड़ी मान्यताएं

– ऐसा माना जाता है कि जो महिला पूरी श्रद्धा से यह व्रत करती है, उसे अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है।
– कुँवारी लड़कियां भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं।
– तीज के दिन मेहंदी लगाने और हरी चूड़ियां पहनने से सौभाग्य और प्रेम में वृद्धि होती है।

हरियाली तीज 2025: खास बात

इस वर्ष तीज का व्रत सोमवार को पड़ रहा है, जो कि शिव जी का दिन माना जाता है। ऐसे में इस दिन व्रत करना विशेष फलदायी माना जा रहा है। धार्मिक दृष्टिकोण से यह संयोग और भी शुभ है और व्रती महिलाओं को विशेष पुण्य की प्राप्ति होगी।

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निष्कर्ष

हरियाली तीज केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मबल, श्रद्धा और सौंदर्य का उत्सव है। यह पर्व सावन की हरियाली में नारी शक्ति के उत्सव का प्रतीक है। यदि आप 2025 में हरियाली तीज व्रत करने जा रही हैं, तो शुभ मुहूर्त और पूजा विधि का ध्यान रखकर इस पर्व को पूरे उत्साह और आस्था के साथ मनाएं। यह न केवल आपकी आंतरिक शक्ति को बढ़ाएगा, बल्कि आपके वैवाहिक जीवन को भी सुख-समृद्धि से भर देगा।