राहुल गांधी के आरोपों पर EC का पलटवार:- विपक्ष द्वारा लगाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे पूरी तरह निराधार बताया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आयोग के लिए सभी राजनीतिक दल बराबर हैं और किसी भी पक्ष को प्राथमिकता नहीं दी जाती।

CEC ने राहुल गांधी के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा,
“हाल ही में देखा गया कि मतदाताओं की तस्वीरें उनकी अनुमति के बिना मीडिया में चलाई गईं। उन पर आरोप लगाए गए, उनका गलत इस्तेमाल हुआ। क्या चुनाव आयोग को किसी भी मतदाता—चाहे वह मां हो, बहू हो या बेटी—का सीसीटीवी फुटेज साझा करना चाहिए? यह निजता के अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।”
“संविधान का अपमान है झूठे आरोप”
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की त्रुटि या गड़बड़ी की शिकायत समय रहते हाईकोर्ट में याचिका दायर कर की जा सकती है। लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद “वोट चोरी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर जनता को गुमराह करना, संविधान का अपमान है। उन्होंने विपक्ष पर मतदाताओं की पहचान और तस्वीरें सार्वजनिक करने का आरोप भी लगाया।
राहुल गांधी को चुनाव आयोग का अल्टीमेटम
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी से कहा है कि वे सात दिनों के भीतर अपने आरोपों पर हलफनामा दाखिल करें। यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो माना जाएगा कि आरोप बेबुनियाद हैं। आयोग ने साफ कर दिया है कि गांधी या तो हलफनामा दें या माफी मांगे—तीसरा कोई विकल्प नहीं है।
राहुल गांधी का आरोप
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हाल ही में सवाल उठाया था कि विपक्षी दलों को डिजिटल मतदाता सूची क्यों नहीं दी जा रही और पोलिंग बूथ के सीसीटीवी व वीडियो सबूत क्यों मिटाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई जगह फर्जी मतदान हुआ और विपक्षी नेताओं को डराने-धमकाने का काम किया गया। गांधी ने यहां तक कह दिया कि “क्या चुनाव आयोग अब भाजपा का एजेंट बन गया है?
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EC की सफाई
इन आरोपों पर चुनाव आयोग का कहना है कि देशभर के एक लाख पोलिंग बूथों के सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा करना व्यावहारिक रूप से असंभव है। ऐसा करने में 273 साल लग जाएंगे। आयोग ने स्पष्ट किया कि अगर कोई उम्मीदवार अदालत में याचिका दायर करता है तो संबंधित फुटेज सुरक्षित रखी जाती है, अन्यथा उन्हें संरक्षित करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।