Vice President Election 2025:- एक बड़ी ख़बर सामने आ रही है आपको बतादे की उपराष्ट्रपति पद के चुनाव की हलचल तेज हो गई है। 9 सितंबर को होने वाले मतदान से पहले सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है। दोनों ही खेमे—एनडीए और इंडी अलायंस—ने अब तक अपने उम्मीदवार का नाम सामने नहीं रखा है, जिससे सस्पेंस और गहरा हो गया है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 21 सितंबर तय की गई है। आईये चलते है पूरी जानकारी की और

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इस्तीफे के बाद बढ़ा सियासी रोमांच

आपको बतादे हाल ही में जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देकर अचानक राजनीतिक हलचल मचा दी थी। उनके इस्तीफे के बाद से ही यह सवाल चर्चा का विषय बन गया है कि अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा।

NDA के पास संख्या बल, विपक्ष की रणनीति पर नजर

संसद के दोनों सदनों को मिलाकर कुल 786 सदस्य हैं, जिनमें से बहुमत के लिए 394 वोटों की आवश्यकता होगी। मौजूदा समीकरणों में एनडीए 422 सांसदों के समर्थन का दावा कर रहा है। बावजूद इसके, भाजपा विपक्षी खेमे को चौंकाने के लिए नए पत्ते खोल सकती है।

कांग्रेस का ‘साउथ कार्ड’?

कांग्रेस की अगुआई वाले इंडी अलायंस के भीतर इस बात पर मंथन चल रहा है कि उनका उम्मीदवार आंध्र प्रदेश या बिहार से हो सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसा करने से कांग्रेस, एनडीए सहयोगी चंद्रबाबू नायडू को असहज स्थिति में डाल सकती है।

YSRCP की भूमिका अहम

आंध्र प्रदेश की राजनीति में जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआरसीपी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी के पास 7 राज्यसभा और 4 लोकसभा सांसद हैं। 2019 के बाद से वाईएसआरसीपी अक्सर केंद्र में एनडीए सरकार का समर्थन करती आई है। हालांकि, हाल के महीनों में नेताओं पर चल रही कानूनी कार्रवाई और सीबीआई जांच के कारण सियासी समीकरण बदलते दिख रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि रेड्डी एनडीए के साथ बने रहते हैं या विपक्ष की तरफ झुकते हैं।

भाजपा का ‘मुस्लिम कार्ड’

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा इस बार मुस्लिम चेहरे पर दांव लगाने पर विचार कर रही है। बिहार के राज्यपाल और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान का नाम संभावित उम्मीदवारों की सूची में शामिल बताया जा रहा है। आरिफ मोहम्मद पहले केरल के राज्यपाल रह चुके हैं और उन्हें अपनी बौद्धिक क्षमता और राजनीतिक निष्ठा के लिए जाना जाता है।

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सियासी समीकरणों में उलटफेर तय

कांग्रेस यदि दक्षिण भारत से उम्मीदवार खड़ा करती है तो आंध्र और बिहार की राजनीति में नया मोड़ आ सकता है। वहीं, भाजपा यदि मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में उतारती है तो विपक्ष को चुनौती देना और भी कठिन हो जाएगा। कुल मिलाकर, यह उपराष्ट्रपति चुनाव न सिर्फ संख्या बल पर बल्कि रणनीतिक चालों पर भी टिका नजर आ रहा है।