SSC Protest:- कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने रविवार को रामलीला मैदान में जोरदार प्रदर्शन किया। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी बड़ा रूप लेगा।

अभ्यर्थियों का कहना है कि साफ-सुथरी और भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती प्रक्रिया उनका अधिकार है। उनका आरोप है कि मौजूदा परीक्षा प्रणाली में खामियों के कारण ईमानदार और मेहनती उम्मीदवारों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। हाल ही में हुई परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक की खबरों ने छात्रों के आक्रोश को और बढ़ा दिया है।
पारदर्शी प्रक्रिया की मांग
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परीक्षाओं के संचालन की जिम्मेदारी किसी प्राइवेट एजेंसी को नहीं दी जानी चाहिए। उनका मानना है कि या तो सरकार स्वयं इसकी जिम्मेदारी ले, या फिर ऐसी स्वतंत्र एजेंसी गठित की जाए जिसकी साख पर कोई सवाल न उठे। छात्रों का कहना है कि बार-बार पेपर लीक होने से देशभर के प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
‘स्टूडेंट्स कमीशन ऑफ इंडिया’ बनाने की मांग
छात्रों ने एक स्वतंत्र आयोग ‘स्टूडेंट्स कमीशन ऑफ इंडिया’ के गठन की भी मांग की है। उनका कहना है कि राजनीतिक हस्तक्षेप और सत्ता परिवर्तन की वजह से अक्सर छात्रों के हित प्रभावित होते हैं। एक स्वतंत्र निकाय उनके अधिकारों की रक्षा कर सकेगा और किसी भी परिस्थिति में निष्पक्ष निर्णय ले पाएगा।
समयबद्ध परीक्षा और परिणाम
अभ्यर्थियों ने यह भी मांग उठाई है कि एसएससी की भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह समयबद्ध बनाया जाए। उनका कहना है कि वैकेंसी निकलने से लेकर परीक्षा और परिणाम तक की पूरी प्रक्रिया अधिकतम 6 से 8 महीने में पूरी होनी चाहिए। इससे हर साल नियमित रूप से परीक्षा आयोजित हो सकेगी और उम्मीदवारों का समय बर्बाद नहीं होगा।
छात्रों की पीड़ा
मुखर्जी नगर में तैयारी कर रहे अभ्यर्थी विवेक श्रीवास्तव ने कहा कि यह आंदोलन केवल कुछ छात्रों का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं और उनके परिवारों से जुड़ा मुद्दा है। वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा गार्गी सिन्हा ने सवाल उठाया कि जब न्याय व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र जैसी अहम जिम्मेदारियां सरकार निजी हाथों में नहीं सौंप सकती, तो फिर लाखों युवाओं के भविष्य का निर्धारण करने वाली परीक्षाएं निजी एजेंसियों को क्यों दी जा रही हैं।
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सरकार का पक्ष
दूसरी ओर, केंद्र सरकार और एसएससी का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। पहले जहां पूरी प्रक्रिया में डेढ़ साल तक का समय लगता था, अब उसे घटाकर 6 से 8 महीने में पूरा किया जा रहा है। सरकार का यह भी दावा है कि तकनीकी उपायों के जरिये प्रश्नपत्र लीक जैसी समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया गया है।