हाल ही में अमेरिका में इमिग्रेशन से जुड़े एक बेहद चौंकाने वाले मामले का खुलासा हुआ है, जहां बेहतर भविष्य की तलाश में पहुंचे कुछ भारतीय नागरिकों पर गंभीर आपराधिक आरोप लगे हैं। आपको बता दें अमेरिकी की जांच एजेंसी एफबीआई ने 11 भारतीयों को गिरफ्तार कर लिया है।

अमेरिका में 11 भारतीयों को FBI ने किया अरेस्‍ट

इन भारतीयों पर आरोप है कि इन लोगों ने अमेरिका के U-Visa कार्यक्रम का फायदा उठाने के लिए नकली हथियारबंद डकैतियों की साजिश रची और कई दुकानों पर योजनाबद्ध तरीके से फर्जी लूट की घटनाएं करवाईं।

FBI की कार्रवाई में 11 भारतीय गिरफ्तार

आपको बता दें अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह मामला सामने आने के बाद अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी यानि FBI ने बड़ी जांच शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि कई राज्यों में संचालित इस नेटवर्क में कुल 11 भारतीय नागरिक शामिल थे।

इनमें से छह लोगों को मैसाचुसेट्स में गिरफ्तार किया गया, जिनमें जितेंद्रकुमार पटेल, महेशकुमार पटेल, संजयकुमार पटेल, अमिताबेन पटेल, संगीताबेन पटेल और मितुल पटेल शामिल हैं। इसके अलावा अन्य आरोपियों को केंटकी, मिसौरी और ओहायो जैसे राज्यों से हिरासत में लिया गया।

आपको बता दें अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ संघीय स्तर पर मामला दर्ज किया गया है और मामले की सुनवाई बोस्टन की फेडरल कोर्ट में की जाएगी।

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U-Visa पाने के लिए रची गई थी पूरी योजना

जांच एजेंसियों का इस मामले पर साफ़ कहना है कि इस पूरे मामले के पीछे अमेरिकी इमिग्रेशन कानून के एक विशेष प्रावधान का दुरुपयोग करने की कोशिश की गई।

अमेरिका में 11 भारतीयों को FBI ने किया अरेस्‍ट

जानकारी के लिए आपको बता दें अमेरिका में U-Visa सिर्फ उन विदेशी नागरिकों को ही दिया जाता है जो किसी गंभीर अपराध के शिकार होते हैं और अपराध की जांच में पुलिस की मदद करते हैं। इस वीजा के माध्यम से पीड़ित व्यक्ति को अमेरिका में रहने और काम करने का कानूनी अवसर मिल सकता है।

एफबीआई के मुताबिक, आरोपियों ने इसी नियम का फायदा उठाने के लिए एक सुनियोजित योजना बनाई। योजना के तहत कुछ दुकानों और छोटे व्यवसायों में नकली डकैती करवाई जाती थी ताकि वहां मौजूद कर्मचारी या मालिक खुद को अपराध का शिकार साबित कर सकें और बाद में U-Visa के लिए आवेदन कर सकें।

दुकानों और रेस्टोरेंट को बनाया गया निशाना

जांच में सामने आया कि इन 11 भारतीय आरोपियों ने इस कथित साजिश के तहत कई प्रकार के छोटे व्यवसायों को निशाना बनाया गया।

इनमें यूटिलिटी स्टोर, शराब की दुकानें और फास्ट-फूड रेस्टोरेंट जैसी जगहें शामिल थीं। रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम छह अलग-अलग नकली डकैती की घटनाएं रची गईं।

आपको बता दें इन आरोपियों द्वारा इस पूरी योजना को इस तरह से अंजाम दिया जाता था कि पहली नजर में यह वास्तविक अपराध जैसा लगे।

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नकली लुटेरा बनकर दुकान में घुसता था आरोपी

एफबीआई की जांच के अनुसार, इस योजना में एक व्यक्ति नकली डकैत की भूमिका निभाता था।

वह बंदूक जैसी दिखने वाली वस्तु लेकर दुकान में प्रवेश करता, कर्मचारियों या दुकानदार को डराता और काउंटर से नकदी लेकर भाग जाता। इस दौरान यह सुनिश्चित किया जाता था कि पूरी घटना दुकान के सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो जाए, ताकि बाद में इसे अपराध के सबूत के रूप में दिखाया जा सके।

पुलिस को सूचना देने में जानबूझकर की जाती थी देरी

अमेरिका जाँच एजेंसी की जांच में यह भी सामने आया कि घटना के तुरंत बाद पुलिस को सूचना नहीं दी जाती थी।

आरोपी जानबूझकर कुछ मिनटों तक इंतजार करते थे ताकि नकली डकैत सुरक्षित रूप से वहां से निकल सके और घटना की सच्चाई सामने न आए।

इस तरह से पूरी घटना को वास्तविक अपराध जैसा दिखाने की कोशिश की जाती थी।

पैसों के लालच में शामिल हुए कई लोग

एफबीआई के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में शामिल लोगों को पैसे का लालच देकर नकली डकैती की घटनाओं में शामिल किया जाता था।

जांच एजेंसियों का आरोप है कि साजिश का मुख्य आयोजक विभिन्न लोगों से पैसे इकट्ठा करता और फिर इस राशि को दुकानदारों व अन्य सहयोगियों के बीच बांट देता था।

इस आर्थिक लालच के कारण कई लोग इस कथित फर्जीवाड़े का हिस्सा बन गए।

कानूनी प्रक्रिया जारी

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए भारतीय आरोपियों को अदालत में पेश किया गया है। शुरुआती सुनवाई के बाद कुछ लोगों को शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया है, जबकि मामले की आगे की सुनवाई बोस्टन की फेडरल कोर्ट में जारी रहेगी।

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कानून प्रवर्तन एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस तरह की साजिश में और कितने लोग शामिल हो सकते हैं।

निष्कर्ष

आपको बता दें अमेरिका में सामने आया यह मामला इमिग्रेशन प्रणाली के दुरुपयोग का एक गंभीर उदाहरण माना जा रहा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि U-Visa जैसे कार्यक्रम का उद्देश्य अपराध के पीड़ितों की मदद करना है, लेकिन इस तरह की साजिशें पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती हैं।

एफबीआई की कार्रवाई के बाद अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।