होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा संकट : मध्य पूर्व में फिर एक बार तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए साफ संकेत दिया है कि वह किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं है चाहे कुछ भी हो जाए। ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf के हालिया बयान ने अमेरिका के साथ बढ़ते टकराव को और भी तीखा कर दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का सख्त रुख
आपको बता दें ईरान ने पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उस पर लगाए गए प्रतिबंध और बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म नहीं होती, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य से किसी भी अंतरराष्ट्रीय जहाज को गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
गालिबाफ ने एक इंटरव्यू में कहा कि अगर ईरान खुद इस मार्ग का उपयोग नहीं कर सकता, तो अन्य देशों के लिए भी इसे इस्तेमाल करना संभव नहीं होगा। यह बयान सीधे तौर पर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है।
वैश्विक तेल आपूर्ति पर मंडराता खतरा
आपको बता दें स्टेट ऑफ़ होर्मुज़ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है।
ऐसे में इस मार्ग का पूरी तरह से बंद होना केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक संकट को जन्म दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबी चली, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।
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सीजफायर खत्म होने के करीब, बढ़ी युद्ध की आशंका
आपको बता दें ईरान और अमेरिका के बीच लागू अस्थायी युद्धविराम अब समाप्ति के करीब है। 22 अप्रैल के बाद अगर कोई नई वार्ता नहीं होती, तो दोनों देशों के बीच फिर से सैन्य टकराव की संभावना बढ़ सकती है ऐसी उम्मीद लगाई जा रही हैं।
अब तक दूसरे दौर की बातचीत की कोई ठोस तारीख सामने नहीं आई है, जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई है।
समुद्री गतिविधियों पर ईरान की कड़ी कार्रवाई
आपको बता दें हाल के दिनों में ईरान ने होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहे कुछ जहाजों को चेतावनी दी और कुछ मामलों में गोलीबारी की घटनाएं भी सामने आई हैं।
आपको बता दें ईरानी नौसेना ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि कोई भी जहाज इस क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश न करे। यह कदम इस बात का संकेत है कि ईरान अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर भी अपनी नीति लागू कर रहा है।
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अमेरिका का प्रस्ताव और कूटनीतिक प्रयास
वहीँ दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump प्रशासन की ओर से ईरान को नए प्रस्ताव भेजे गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के माध्यम से दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की बातचीत की कोशिशें लगातार जारी हैं।
हालांकि, हाल ही में चल रहें मौजूदा हालात को देखते हुए यह साफ नहीं है कि ये दुबारा से किए गए कूटनीतिक प्रयास कितने सफल हो पाएंगे।
‘शहादत’ वाले बयान से बढ़ा तनाव
गालिबाफ ने अपने बयान में कहा कि उनके लिए शहादत से बड़ी कोई उपलब्धि नहीं है और वह अपने देश के अधिकारों की रक्षा के लिए हर बलिदान देने को तैयार हैं।
इस तरह के बयान यह दर्शाते हैं कि ईरान अपने रुख पर अडिग है और अमेरिका के दबाव में आने के मूड में नहीं है।
क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव
आपको बता दें विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि इसका असर पूरे मध्य पूर्व, एशिया और वैश्विक अर्थव्यवस्था तेजी से पड़ सकता है।
ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सभी इस संकट से प्रभावित हो सकते हैं।
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होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान का सख्त रुख और अमेरिका के साथ बढ़ता तनाव आने वाले दिनों में वैश्विक स्थिति को और जटिल बना सकता है। कूटनीतिक समाधान की कोशिशें जारी हैं, लेकिन हालात जिस दिशा में बढ़ रहे हैं, वह किसी बड़े टकराव की ओर इशारा करते हैं। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या बातचीत से समाधान निकलेगा या यह संकट और गहराएगा।
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