होर्मुज़ स्ट्रेट में बढ़ा टकराव : ईरान में स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ मार्ग को लेकर मध्य पूर्व में एक बार फिर से तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। आपको बता दें हाल ही में तीन अलग-अलग मालवाहक जहाज़ों को निशाना बनाए जाने और उनमें से दो को ईरान द्वारा अपने नियंत्रण में लेने की घटना ने वैश्विक व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

आपको बता दें यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही कूटनीतिक टकराव लगातार जारी है।
होर्मुज़ स्ट्रेट में लगातार हमले, दो जहाज़ों पर ईरान का कब्ज़ा
आपको बता दें स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर लगातार हमले हो रहें हैं वहीँ बुधवार को होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजर रहे तीन कार्गो जहाज़ों पर हमले की खबर सामने आई। अंतरराष्ट्रीय समुद्री निगरानी एजेंसियों के अनुसार, इन घटनाओं में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की भूमिका बताई जा रही है ;लेकिन अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, “एमएससी फ्रांसेस्का” और “एपामिनोंडास” नामक जहाज़ों को ईरानी नौसेना ने रोककर अपने नियंत्रण में ले लिया और उन्हें ईरानी तट की ओर मोड़ दिया गया। ईरानी पक्ष का दावा है कि ये जहाज़ आवश्यक अनुमति के बिना क्षेत्र में संचालन कर रहे थे और उनके नेविगेशन सिस्टम में गड़बड़ी पाई गई।
गोलीबारी की घटना: कंटेनर जहाज़ को हुआ भारी नुकसान
आपको बता दें इस घटना में यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर के अनुसार, एक जहाज़ के पास ईरानी गनबोट पहुंची और बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में जहाज़ के कंट्रोल रूम को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
बताया जा रहा है कि यह घटना ओमान के तट से करीब 15 नॉटिकल मील दूर हुई। जहाज़ पर ग्रीस का झंडा लगा हुआ था। इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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दूसरा जहाज़ “यूफोरिया” भी निशाने पर
आपको बता दें हमलों की श्रृंखला में दूसरा कार्गो जहाज़ भी “यूफोरिया” भी शामिल है, जो पनामा के झंडे के तहत संचालित हो रहा था और एक यूएई-आधारित कंपनी से जुड़ा बताया गया है।
यह जहाज़ जब होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजर रहा था, तब उस पर हमला हुआ। हालांकि, जहाज़ के चालक दल को सुरक्षित बताया गया है और किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। हमले के बाद जहाज़ को रोक दिया गया और वह फिलहाल सुरक्षित स्थिति में बताया जा रहा है।
तीसरा जहाज़ भी रोका गया, समुद्री गतिविधियां प्रभावित
2 जहाजों पर हमला करने के बाद भी तीसरा जहाज़ “एमएससी फ्रांसेस्का” ओमान की खाड़ी की ओर बढ़ रहा था, जब उसे ईरानी बलों ने रोक दिया। रिपोर्ट के अनुसार, जहाज़ को एंकर डालने का आदेश दिया गया और उसके बाद उसे ईरानी नियंत्रण में ले लिया गया।
इन घटनाओं के बाद होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले अन्य जहाज़ों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है, जिससे वैश्विक व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है।
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अमेरिका-ईरान तनाव और कूटनीतिक गतिरोध
आपको बता दें इन घटनाओं से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने युद्धविराम की समय सीमा को बढ़ाने की घोषणा की थी। इसके साथ ही अमेरिका ने होर्मुज़ स्ट्रेट पर अपनी रणनीतिक नाकेबंदी जारी रखी है, जिसका उद्देश्य ईरान पर दबाव बनाना बताया जा रहा है।
हालांकि, प्रस्तावित शांति वार्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance का पाकिस्तान दौरा भी टल गया है, जिससे कूटनीतिक प्रक्रिया पर अनिश्चितता और बढ़ गई है।
ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया, बढ़ सकती है सैन्य कार्रवाई
आपको बता दें ईरान की संसद से जुड़े अधिकारियों ने अमेरिका के कदमों को ‘रणनीतिक चाल’ बताते हुए इसकी आलोचना की है। उनका कहना है कि युद्धविराम बढ़ाना केवल समय हासिल करने की कोशिश है, ताकि भविष्य में अचानक हमला किया जा सके।
ईरानी पक्ष ने यह भी संकेत दिया है कि अगर दबाव की रणनीति जारी रही, तो इसका जवाब सैन्य कार्रवाई के रूप में दिया जा सकता है। इससे क्षेत्र में संघर्ष और तेज होने की आशंका बढ़ गई है।
पहले भी हुई थी जहाज़ों की जब्ती, बढ़ता जा रहा विवाद
इससे पहले भी कई बार जह्जों को जब्त किया गया था आपको बता दें हाल के दिनों में अमेरिका द्वारा एक ईरानी समर्थित टैंकर को जब्त किए जाने की घटना भी सामने आई थी। अमेरिका ने इसे अवैध नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई बताया, जबकि ईरान ने इसे ‘खुलेआम लूट’ करार दिया।
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इन घटनाओं ने दोनों देशों के बीच अविश्वास को और गहरा कर दिया है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।
होर्मुज़ स्ट्रेट में ताजा घटनाएं केवल क्षेत्रीय तनाव का संकेत नहीं हैं, बल्कि यह वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती हैं। लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियां और कूटनीतिक अस्थिरता इस बात की ओर इशारा करती हैं कि आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
अगर दोनों पक्ष जल्द ही बातचीत के रास्ते पर नहीं लौटते, तो यह तनाव एक बड़े संघर्ष का रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।
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