कोलकाता में स्ट्रॉन्ग रूम पर विवाद:- पश्चिम बंगाल चुनाव के बीच कोलकाता में स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर नया विवाद सामने आया है। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने आरोप लगाया है कि मतपेटियों की सुरक्षा और निगरानी में नियमों का पालन नहीं हो रहा है।

नेताजी इंडोर स्टेडियम के बाहर धरना

कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम के बाहर TMC नेताओं शशि पांजा और कुणाल घोष ने स्ट्रॉन्ग रूम के सामने धरना शुरू किया। नेताओं का कहना है कि उन्हें अंदर की प्रक्रिया देखने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
स्थिति तब और संवेदनशील हो गई जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंचीं और अधिकारियों से जवाब मांगा। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई।

TMC के आरोप क्या हैं?

TMC नेताओं का दावा है कि स्ट्रॉन्ग रूम के अंदर कुछ गतिविधियां बिना राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी के की जा रही हैं। उनका कहना है कि यह चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता के खिलाफ है।
शशि पांजा ने सवाल उठाया कि अगर सब कुछ नियमों के अनुसार हो रहा है, तो फिर पार्टियों को अंदर जाने से क्यों रोका जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अंदर कौन लोग मौजूद हैं और क्या काम हो रहा है, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही।

लाइव स्ट्रीमिंग पर उठे सवाल

कुणाल घोष ने चुनाव आयोग की लाइव स्ट्रीमिंग का हवाला देते हुए कहा कि अंदर कुछ गतिविधियां दिखाई दे रही हैं, लेकिन TMC का कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि जब वे अंदर जाने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें दूसरे उम्मीदवारों से बात करने को कहा जाता है, जो उनके मुताबिक उचित जवाब नहीं है।

भाजपा की प्रतिक्रिया

वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को खारिज किया है। भाजपा नेता तपस रॉय ने कहा कि स्ट्रॉन्ग रूम में तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है और किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि TMC हार की आशंका के चलते भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है।

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चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल

इस पूरे मामले में भारतीय निर्वाचन आयोग की भूमिका भी चर्चा में है। विपक्षी दलों की ओर से निगरानी और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

उठते हुए प्रमुख सवाल

  • क्या स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी में सभी दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी सुनिश्चित की जा रही है?
  • अगर लाइव स्ट्रीमिंग हो रही है, तो फिर प्रतिनिधियों को अंदर जाने से क्यों रोका जा रहा है?
  • क्या चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है या कहीं कोई चूक हो रही है?
  • क्या इस मामले में स्वतंत्र जांच की जरूरत है?

कोलकाता में उभरा यह विवाद चुनावी माहौल को और संवेदनशील बना रहा है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है।