महत्वपूर्ण ख़बर लंबित मामलों के त्वरित और सरल समाधान के उद्देश्य से 14 मार्च को हमीरपुर में विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव महेन्द्र कुमार पाण्डेय ने जानकारी देते हुए बताया कि जिला न्यायालय परिसर में लोक अदालत आयोजित की जाएगी, जहां पर विभिन्न विभागों से जुड़े मामलों का निस्तारण आपसी सहमति और सुलह के आधार पर किया जाएगा।

आपको बता दें लोक अदालत का उद्देश्य होता है आम लोगों को लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से राहत दिलाना और कम समय में विवादों का समाधान करना होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन और न्यायिक तंत्र ने इस आयोजन की तैयारियां तेज कर दी हैं।
विभिन्न विभागों को दिए गए निर्देश
आपको बता दें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आयोजित बैठक में अलग अलग विभागों के अधिकारियों को साफ़ निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने विभागों से जुड़े अधिक से अधिक मामलों को लोक अदालत के लिए चिन्हित करें।
जानकारी के अनुसार समीक्षा बैठक के दौरान यह पाया गया कि कुछ विभागों ने लोक अदालत के लिए पर्याप्त संख्या में मामलों को चिन्हित किया है, लेकिन कुछ विभाग ऐसे भी हैं जिन्होंने बहुत कम मामलों को चिन्हित किया है। इस पर सचिव महेन्द्र कुमार पाण्डेय ने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों से कहा कि लोक अदालत के माध्यम से अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण कराने की दिशा में गंभीरता से प्रयास किए जाएं।

उन्होंने साफ़ तोर पर कहा कि लोक अदालत का उद्देश्य है आम लोगों को राहत देना है, इसलिए सभी विभागों से कहना चाहता हूँ सभी को अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। यदि विभागों द्वारा ज्यादा मामलों को चिन्हित किया जाएगा तो बड़ी संख्या में लोगों को त्वरित न्याय मिल सकेगा।
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जनता की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
आपको बता दें इस बैठक के दौरान अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए कि लोक अदालत के प्रति आम लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक स्तर पर जोरशोर से प्रचार-प्रसार भी किया जाए। इसके लिए जिले के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर जानकारी उपलब्ध कराने और लोगों को लोक अदालत में अपने मामलों के निस्तारण के लिए प्रेरित करने की योजना बनाई गई है।
आपको बता दें प्राधिकरण के सचिव ने कहा कि लोक अदालत तभी सफल हो सकती है जब अधिक से अधिक लोग इस लोक अदालत में भाग लें और अपने मामलों को आपसी सहमति से निपटाने की कोशिश करें।
इसके लिए न्यायालय परिसर के अलावा कलेक्ट्रेट, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, अस्पताल, हाट बाजार, तहसील मुख्यालय और बैंकों जैसे स्थानों पर जागरूकता अभियान चलाने की बात कही गई है। इन जगहों पर पोस्टर, बैनर और अन्य माध्यमों से लोगों को लोक अदालत के बारे में जानकारी दी जाएगी।
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किन मामलों का हो सकता है निस्तारण
आपको बता दें इस विशेष लोक अदालत में सामान्यतः ऐसे मामलों का निपटारा किया जाता है जिन्हें आपसी समझौते के आधार पर सुलझाया जा सकता है। इनमें बैंक ऋण से जुड़े मामले, बिजली बिल विवाद, बीमा से जुड़े मामले, पारिवारिक विवाद, मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले और छोटे-मोटे दीवानी विवाद यह सभी मामले शामिल हो सकते हैं।
लोक अदालत की खास बात यह होती है कि इसमें दोनों पक्षों की सहमति से फैसला किया जाता है और इस फैसले को अदालत के फैसले के समान ही कानूनी मान्यता प्राप्त होती है। इसके अलावा लोक अदालत में निस्तारित मामलों में कोर्ट फीस भी नहीं लगती और यदि पहले फीस जमा की गई हो तो उसे वापस भी किया जा सकता है।
आम लोगों के लिए आसान न्याय का माध्यम
14 मार्च को लगने जा रही इस लोक अदालत पर विशेषज्ञों का मानना है कि लोक अदालतें न्याय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। यह व्यवस्था उन सभी लोगों के लिए काफी लाभदायक है जो लंबे समय तक अदालतों में मुकदमेबाजी नहीं करना चाहते या जिनके पास लंबी कानूनी प्रक्रिया में खर्च करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते।
आपको बता दें लोक अदालत के माध्यम से कम समय में विवादों का समाधान होने से न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है और लोगों को जल्दी न्याय भी मिल पाता है।
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अधिकारियों की बैठक में कई विभागों की भागीदारी
की आपको बता दें की गई इस बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी और प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। बैंकिंग क्षेत्र की ओर से नोडल अधिकारी, एलडीएम (लीड बैंक मैनेजर) सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे। इसके अलावा परिवहन विभाग, दूरसंचार विभाग और अन्य प्रशासनिक इकाइयों के अधिकारी भी इस विशेष बैठक में शामिल हुए।
परिवहन विभाग की ओर से वरिष्ठ सहायक और तहसील स्तर के अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे। वहीं दूरसंचार विभाग से भी प्रतिनिधियों ने भाग लिया और लोक अदालत की तैयारियों में सहयोग देने का आश्वासन दिया।
प्रशासन की अपील
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने आम जनता से अपील की है कि जिन लोगों का भी मामला कोर्ट में चल रहा है और उन्हें लगता है है की उनका मामला आपसी सहमति से सुलझाए जा सकते हैं, वे 14 मार्च को आयोजित होने वाली लोक अदालत में भाग लेकर अपने मामलों का समाधान कराएं।
प्राधिकरण का मानना है कि यदि अधिक से अधिक लोग इस पहल में शामिल होंगे तो न केवल विवादों का समाधान तेजी से होगा बल्कि समाज में आपसी सौहार्द और विश्वास भी बढ़ेगा।
