Axiom-4 मिशन:- भारत के (ISS) अंतरिक्ष अभियान में एक और ऐतिहासिक मोड़ सामने आया है भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला, जिन्होंने 18 दिनों तक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर शोध और प्रयोग किए, अब धरती पर वापसी की ओर अग्रसर हैं। वह Axiom-4 मिशन का हिस्सा थे, जो भारत के अलावा हंगरी और पोलैंड जैसे देशों की भी दशकों बाद अंतरिक्ष में वापसी का प्रतीक है।

शुक्ला का स्पेसक्राफ्ट सोमवार को भारतीय समयानुसार शाम 4:50 बजे ISS से अलग हुआ है और अब यह 22.5 घंटे की यात्रा के बाद मंगलवार को अमेरिका के कैलिफोर्निया तट के पास समुद्र में उतरने वाला है।

पूरी तरह ऑटोमैटिक लैंडिंग सिस्टम

स्पेसक्राफ्ट की यह वापसी एक पूर्णतः स्वचालित प्रक्रिया के ज़रिए होगी। अनडॉकिंग के तुरंत बाद यान अंतरिक्ष स्टेशन से सुरक्षित दूरी तय करेगा और पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। इस दौरान जबरदस्त गर्मी पैदा होगी, जिसका सामना करने के लिए स्पेसक्राफ्ट को विशेष थर्मल प्रोटेक्शन से लैस किया गया है।

पैराशूट की दो-स्तरीय प्रणाली

वायुमंडल में घुसते ही यान की गति को नियंत्रित करने के लिए एक क्रमबद्ध पैराशूट प्रणाली सक्रिय होगी। पहले चरण में लगभग 5.7 किलोमीटर की ऊंचाई पर छोटे पैराशूट खुलेंगे, जो स्पेसक्राफ्ट को स्थिर बनाएंगे। इसके बाद मुख्य पैराशूट लगभग 2 किलोमीटर की ऊंचाई पर खुलेंगे, जो स्प्लैशडाउन को सुरक्षित बनाएंगे।

भारत के लिए मील का पत्थर

यह मिशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार, शुभांशु शुक्ला द्वारा किया गया यह अंतरिक्ष अभियान गगनयान मिशन 2027 के लिए तकनीकी और अनुभवजन्य आधार प्रदान करेगा। इस मिशन में भारत ने अनुमानतः ₹550 करोड़ का निवेश किया है।

अंतरिक्ष से भारत की ताकत का संदेश

रविवार को हुए विदाई समारोह में शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष से वीडियो संदेश के ज़रिए कहा इस यात्रा ने मुझे न केवल तकनीकी दृष्टि से समृद्ध किया है, बल्कि यह अहसास भी दिलाया है कि आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है, वैश्विक मंच पर मजबूती से खड़ा है।

उन्होंने भारत की प्रगति को रेखांकित करते हुए कहा, “1984 में राकेश शर्मा ने जो भारत देखा था, अब वह और अधिक उन्नत, आत्मनिर्भर और महत्वाकांक्षी दिखाई देता है।

केंद्रीय मंत्री का संदेश

इस मिशन की वापसी को लेकर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “शुभांशु की वापसी सिर्फ एक यात्रा का अंत नहीं है, यह भारत की नई अंतरिक्ष पहचान की शुरुआत है।” उन्होंने बताया कि शुक्ला ने अंतरिक्ष में जो प्रयोग किए वे स्वदेशी तकनीक और किट्स पर आधारित थे, जिन्हें IISc बेंगलुरु, IITs और जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने मिलकर तैयार किया था।

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वापसी के बाद रिहैबिलिटेशन

धरती पर सफल लैंडिंग के बाद, शुक्ला और उनकी टीम को सात दिनों तक पुनर्वास चरण से गुजरना होगा। अंतरिक्ष के भारहीन वातावरण से बाहर आने के बाद शरीर को पृथ्वी के गुरुत्व में दोबारा ढालने के लिए वैज्ञानिकों की देखरेख में विशेष अभ्यास और चिकित्सकीय निगरानी की व्यवस्था की जाएगी।