Bangladesh Violence: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के बीच इन दिनों असुरक्षा की भावना तेज़ होती दिख रही है। बांग्लादेश अभी हाल के महीनों में हुई कई हिंसक घटनाओं ने इस डर को और गहरा कर दिया है, खासकर तब जब देश में चुनाव नज़दीक हैं। सवाल यह है कि आखिर बांग्लादेश में हिंदुओं को किस बात का सबसे ज़्यादा डर सता रहा है?

लगातार हमलों से टूटा भरोसा
दिसंबर 2025 में बांग्लादेश के मैमनसिंह ज़िले में हुई एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे देश को झकझोर के रख दिया। आपको बता दें 27 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास पर उनके कुछ मुस्लिम सहकर्मियों ने पैगंबर मुहम्मद के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया। आरोप यह लगाया गया है की उनके कार्यस्थल पर बड़ी संख्या में भीड़ जमा हो गई। बताया जा रहा है की हालात इतने बिगड़े कि दीपू को बेरहमी से पीटा गया, पेड़ से लटकाया गया और फिर आग के हवाले कर दिया गया।
लेकिन आपको बता दें पुलिस ने इस मामले में करीब एक दर्जन लोगों की गिरफ्तारी कर ली है और अंतरिम सरकार ने जांच के आदेश दिए, लेकिन मानवाधिकार संगठनों और हिंदू समुदाय के नेताओं का कहना है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि एक बड़े और खतरनाक पैटर्न का हिस्सा है।
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चुनावी माहौल और बढ़ती बेचैनी
मिली जानकारी के अनुसार बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी करीब 8 प्रतिशत है, जबकि मुस्लिम आबादी लगभग 91 प्रतिशत बताई जाती है। लंबे समय से हिंदुओं को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग का समर्थक माना जाता रहा है। यही वजह है कि आगामी 12 फरवरी 2026 के चुनाव से पहले हिंदू समुदाय खुद को ज़्यादा असुरक्षित महसूस कर रहा है।
ग्रामीण इलाकों में हो रहे हमलों को लेकर आशंका जताई जा रही है कि इसका मकसद अल्पसंख्यकों को डराकर उनके वोटिंग व्यवहार को प्रभावित करना हो सकता है।

इस्लामी दलों की वापसी
वहीँ आपको बता दें इस वक्त बांग्लादेश में राजनीतिक परिदृश्य में इस समय जमात-ए-इस्लामी जैसी इस्लामी पार्टियों की दोबारा सक्रियता भी चर्चा में है। ये दल अपनी छवि बदलने की कोशिश कर रहे हैं—हिंदू प्रतिभागियों वाली रैलियां, यहां तक कि हिंदू उम्मीदवार उतारने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये प्रयास ज़्यादातर प्रतीकात्मक हैं और ज़मीनी हकीकत में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस भरोसा नहीं दिलाते।
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भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर असर
बांग्लादेश में इन घटनाओं का असर भारत और बांग्लादेश के रिश्तों पर भी दिखने लगा है। भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों के पैटर्न पर चिंता जताई है, जबकि बांग्लादेश सरकार ने इसे भारत-विरोधी भावना भड़काने की कोशिश बताया है। हालात इतने संवेदनशील हो गए कि दोनों देशों के बीच वीज़ा सेवाएं तक प्रभावित हुई हैं।

परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
वहीँ आपको बता दें इस गंभीर घटना के बाद दीपू चंद्र दास की मौत ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। उनकी मां शेफाली रानी दास सरकार से न्याय की गुहार लगा रही हैं। उनका कहना है कि उनका बेटा परिवार का इकलौता कमाने वाला था और उसकी मौत के बाद पत्नी और मां का भविष्य अंधेरे में चला गया है।
दीपू की कहानी अकेली नहीं है। ऐसी कई घटनाएं हैं जो बांग्लादेश में बढ़ती कट्टरता की ओर इशारा करती हैं। यही वजह है कि आज हिंदू समुदाय के बीच डर, असुरक्षा और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
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चुनाव नज़दीक हैं, राजनीतिक माहौल गर्म है और ज़मीनी स्तर पर हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में बांग्लादेश के हिंदू समुदाय को सबसे ज़्यादा चिंता अपनी सुरक्षा और भविष्य की है। सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में हालात सुधरेंगे, या यह डर और गहराता जाएगा?
