नई राज्यपाल नियुक्ति 2024:- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तीन राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के लिए राज्यपाल और उपराज्यपाल की नई नियुक्तियों को मंजूरी दी है। राष्ट्रपति भवन द्वारा सोमवार को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया कि कविंदर गुप्ता को लद्दाख का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है, जबकि अशीम कुमार घोष को हरियाणा और पुसापति अशोक गजपति राजू को गोवा का नया राज्यपाल बनाया गया है। यह नियुक्तियां पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होंगी।

Source:- Amar Ujala

बीडी मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार

राष्ट्रपति भवन ने जानकारी दी कि लद्दाख के वर्तमान उपराज्यपाल ब्रिगेडियर बीडी मिश्रा (सेवानिवृत्त) का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। उनके स्थान पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री कविंदर गुप्ता को लद्दाख का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है।

तीनों नए पदाधिकारियों का संक्षिप्त परिचय

पुसापति अशोक गजपति राजू – गोवा के राज्यपाल

पुसापति अशोक गजपति राजू तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के वरिष्ठ नेता हैं। वे 2014 से 2018 तक केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री रहे। 16वीं लोकसभा में वे विजयनगरम से सांसद के रूप में निर्वाचित हुए। इससे पहले वे आंध्र प्रदेश सरकार में वाणिज्यिक कर, वित्त, विधायी मामले, आबकारी और राजस्व जैसे महत्वपूर्ण विभागों में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। वे 1978 से 2014 तक सात बार आंध्र प्रदेश विधानसभा के सदस्य भी रहे।

प्रोफेसर अशीम कुमार घोष – हरियाणा के राज्यपाल

प्रोफेसर अशीम कुमार घोष एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् और राजनीतिज्ञ हैं। उनका जन्म 1944 में पश्चिम बंगाल के हावड़ा में हुआ। उन्होंने कोलकाता के विद्यासागर कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और बाद में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर के रूप में शिक्षण कार्य किया। घोष 1991 में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और 1999 से 2002 तक पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। उनके कार्यकाल में पार्टी ने राज्य में अपना जनाधार मजबूत किया। 2003 से 2005 के बीच वे त्रिपुरा के लिए भाजपा के पर्यवेक्षक भी रहे।

कविंदर गुप्ता – लद्दाख के उपराज्यपाल

कविंदर गुप्ता जम्मू-कश्मीर से भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से भी लंबे समय से जुड़े रहे हैं। वे तीन बार जम्मू नगर निगम के मेयर चुने गए, जो शहर में एक रिकॉर्ड है। उन्होंने 2018 में महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार में उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। गठबंधन टूटने के बाद उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था। गुप्ता संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय रहे हैं और पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं में गिने जाते हैं।

यह भी पड़े:- दिल्ली बम धमकी अलर्ट: तीन स्कूलों को ईमेल के जरिए मिली धमकी, पुलिस और बम निरोधक दस्ते ने शुरू की जांच

नवीन नेतृत्व से अपेक्षाएं

इन नियुक्तियों को प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता के संतुलन के रूप में देखा जा रहा है। लद्दाख जैसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में एक अनुभवी राजनेता की तैनाती को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। वहीं, हरियाणा और गोवा में नए राज्यपालों से बेहतर प्रशासन और केंद्र-राज्य समन्वय की उम्मीद की जा रही है।