तमिलनाडु कस्टोडियल डेथ केस : तमिलनाडु से एक बड़ा और चौका देने वाला मामला सामने आया है जहाँ तमिलनाडु के चर्चित कस्टोडियल डेथ मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए Madurai की जिला अदालत ने थाने के नौ पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है।

तमिलनाडु कस्टोडियल डेथ केस

यह मामला एक पिता और बेटे की पुलिस हिरासत में हुई मौत से जुड़ा है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। जिला अदालत ने अपने फैसले में पुलिस की बर्बरता पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताया।

अदालत की कड़ी टिप्पणी: “दिल दहला देने वाला मामला”

आपको बता दें मदुरै जिला अदालत ने इस गंभीर और दिल दहला देने वाले मामले को लेकर अपने फैसले में कहा कि जिस तरह से 9 पुलिसकर्मीयों द्वारा पिता और बेटे के साथ व्यवहार किया गया, वह बेहद अमानवीय और डरावना था। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों को हिरासत में बेरहमी से प्रताड़ित किया गया।

आपको बता दें जज ने इस मामले को लेकर यह भी कहा कि यदि इस मामले पर न्यायिक निगरानी नहीं होती, तो संभव है कि सच्चाई सामने ही नहीं आ पाती। अदालत ने इसे न्याय व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण केस बताया है।

दोषी पुलिसकर्मियों को सख्त सजा

इस मामले में 9 पुलिसकर्मियों को सजा सुनाई गई है उनके नाम हैं इंस्पेक्टर श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर बालाकृष्णन और रघु गणेश समेत कुल नौ पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया। अन्य दोषियों में मुरुगन, समदुरई, मुथुराजा, चेल्लादुरई, थॉमस फ्रांसिस और वेइलुमुथु शामिल हैं।

आपको बता दें अदालत ने इन सभी दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। साथ ही इंस्पेक्टर श्रीधर पर 15 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की सजा समाज में एक सख्त संदेश देने के लिए जरूरी है।

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सीबीआई की जांच और अहम सबूत

इस केस की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंपी गई थी। जांच एजेंसी ने अदालत में अधिकतम सजा की मांग की थी।

इस मामले में सीसीटीवी फुटेज जैसे महत्वपूर्ण सबूत अदालत में पेश किए गए, जो आमतौर पर ऐसे मामलों में सामने नहीं आते। इन सबूतों ने यह साबित करने में अहम भूमिका निभाई कि हिरासत में दोनों के साथ क्रूरता की गई थी।

क्या था पूरा मामला?

अब समझते आखिर क्या था पूरा मामला आपको बता दें यह घटना 19 जून 2020 की है, जब लॉकडाउन के दौरान एक मोबाइल दुकान चलाने वाले पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स को दुकान देर तक खुली रखने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

दोनों को पुलिस स्टेशन ले जाया गया और बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। कुछ ही दिनों में दोनों की मौत हो गई। परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस हिरासत में उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई थी इस कारण से उनकी मौत हुई है।

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हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद तेज हुई कार्रवाई

आपको बता दें इस मामले ने तूल पकड़ने के बाद Madras High Court ने हस्तक्षेप किया और निष्पक्ष जांच के आदेश दिए। शुरुआत में राज्य एजेंसी ने जांच की, लेकिन बाद में केस CBI को सौंप दिया गया।

CBI ने कई पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ हत्या के आरोप तय किए, जिसके बाद मामला अदालत में चला।

पुलिस सिस्टम और कानून पर बड़ा संदेश

अदालत ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय पूरे पुलिस विभाग पर सवाल नहीं उठाता, बल्कि उन लोगों के खिलाफ है जिन्होंने अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया।

यह फैसला कानून के शासन को मजबूत करने और यह दिखाने के लिए अहम माना जा रहा है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।

मदुरै कोर्ट का यह फैसला भारत में न्याय और जवाबदेही की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। यह मामला न सिर्फ पुलिस सुधार की जरूरत को उजागर करता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि न्याय में देर हो सकती है, लेकिन अंधेर नहीं।

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