फतेहपुर में धार्मिक स्थल को लेकर बवाल:- जिले के आबूनगर रेड्डया इलाके में सोमवार को मंदिर और मकबरे को लेकर वर्षों से चल रहा विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। हिंदू संगठनों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने ठाकुरद्वारा मंदिर होने का दावा करते हुए मकबरे पर कब्ज़ा जमाया, मजारों में तोड़फोड़ की और भगवा झंडा फहराया। इसके बाद दूसरे समुदाय के लोगों के विरोध के चलते दोनों पक्षों में जमकर पथराव और मारपीट हुई।

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सुबह से ही जुटने लगे कार्यकर्ता

सोमवार सुबह नौ बजे से ही कर्पूरी ठाकुर चौराहे पर भाजपा और विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता जुटने लगे। सोशल मीडिया पर मंदिर के “शुद्धिकरण” और नियमित पूजा की अपील के बाद यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। भाजपा जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल, विहिप प्रांत उपाध्यक्ष वीरेंद्र पांडेय समेत कई नेता मौके पर मौजूद थे। भीड़ में कई लोग भगवा झंडे और डंडे लिए थे।

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बैरिकेडिंग तोड़कर मकबरे तक पहुंचे

करीब 11 बजे माहौल अचानक गरमा गया। भीड़ ने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ दी और लगभग 300 लोग मकबरे परिसर में घुस गए। इस दौरान वहां मौजूद पुलिस बल संख्या में कम था। अंदर पहुंचते ही भीड़ ने नारेबाजी की, धूपबत्ती जलाई, पूजा-अर्चना की और मजारों व कब्रों पर लाठियां बरसाईं। पुलिस के रोकने के बावजूद कई स्थानों पर भगवा झंडे लगा दिए गए।

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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के समय किसी के पास पहले से तोड़फोड़ के औजार नहीं थे, सिर्फ डंडे, बल्लियां और ईंटें थीं। आशंका जताई जा रही है कि मौके पर किसी के उकसाने से ही तोड़फोड़ की गई।

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20 मिनट का कब्ज़ा, फिर बवाल

करीब 20 मिनट तक मकबरे पर कब्ज़ा बनाए रखने के बाद जैसे ही भीड़ पीछे हटी, दूसरे समुदाय के लोग भी वहां पहुंच गए। भगवा झंडा देखकर उनमें आक्रोश फैल गया और दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक के बाद पथराव शुरू हो गया। देखते ही देखते पत्थरों की बौछार और भगदड़ में कई लोग घायल हो गए, जिनमें बजरंग दल और विहिप के पदाधिकारी भी शामिल हैं।

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अधिकारियों ने संभाले हालात

घटना की सूचना मिलते ही डीएम रविंद्र सिंह, एसपी अनूप सिंह, एडीएम और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। हालात बिगड़ते देख कौशांबी और बांदा जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल और पीएसी की एक प्लाटून मंगाई गई। दो घंटे तक नारेबाजी और तनाव जारी रहा, जिसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग कर माहौल शांत कराया।

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एफआईआर और नामजद आरोपी

पुलिस ने इस मामले में भाजपा जिला पंचायत सदस्य अजय सिंह, सभासद रितिक पाल, विनय तिवारी, पुष्पराज पटेल समेत 10 लोगों को नामजद किया है, जबकि 150 अज्ञात पर भी मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि पहचान किए गए सभी उपद्रवियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद नया नहीं है। 7 अगस्त को ‘मंदिर मठ संरक्षण संघर्ष समिति’ ने डीएम को ज्ञापन देकर इस स्थल को प्राचीन ठाकुरद्वारा मंदिर बताया था। समिति का आरोप था कि यहां बिना अनुमति मजारें बनाई गई हैं और हाल ही में रंगाई-पुताई की गई है। समिति ने सोमवार को साफ-सफाई और पूजा-अर्चना का कार्यक्रम घोषित किया था, जिसके बाद प्रशासन ने शांति बनाए रखने के लिए बैठक की थी।

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सुरक्षा चूक पर सवाल

स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) ने घटना की संभावना जताते हुए पहले ही रिपोर्ट भेजी थी और प्रशासन को अलर्ट किया था, लेकिन मकबरे के आसपास पर्याप्त पुलिस बल तैनात नहीं किया गया। पुलिस चौराहों पर तो मौजूद थी, लेकिन मुख्य स्थल पर बल की कमी रही, जिससे भीड़ आसानी से परिसर में घुस गई। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि अगर समय रहते पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था होती तो घटना टल सकती थी।

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पहली बार धार्मिक स्थल पर तोड़फोड़

फतेहपुर में पहले भी साम्प्रदायिक झड़पें हो चुकी हैं—2015 में दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान और 2016 में मकर संक्रांति के जुलूस के समय पथराव की घटनाएं हुई थीं—लेकिन यह पहली बार है जब किसी धार्मिक स्थल में घुसकर तोड़फोड़ और कब्ज़े की कोशिश की गई है।

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ऐतिहासिक महत्व वाला ढांचा

स्थानीय लोगों के अनुसार, मकबरे का चबूतरा ककई ईंटों से बना है और इमारत पुरानी पद्धति से निर्मित है। अनुमान है कि यह ढांचा 200 साल से भी पुराना है। 2010 में सिविल कोर्ट के आदेश के बाद इसे मकबरा दर्ज किया गया था।

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रातभर निगरानी, छावनी में तब्दील इलाकाt

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घटना के बाद मकबरे के आसपास भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। डीएम और एसपी सहित वरिष्ठ अधिकारी देर रात तक मौके पर मौजूद रहे और हर गतिविधि पर नज़र रखी। जिले के अन्य संवेदनशील इलाकों में भी गश्त बढ़ा दी गई है। विधायकों और समुदाय के नेताओं ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।