महाराष्ट्र चुनाव विश्लेषक संजय कुमार पर एफआईआर:- एक बार फिर चौकाने वाली ख़बर सामने आ रही है आपको बतादे महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता डाटा को लेकर मचे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। चुनाव विश्लेषक और लोकनीति-सीएसडीएस के सह-निदेशक संजय कुमार के खिलाफ नागपुर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि उन्होंने चुनाव संबंधी आंकड़ों को लेकर भ्रामक जानकारी साझा की। यह कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत की गई है। वहीं, नासिक के सरकारवाड़ा पुलिस थाने में भी चुनाव आयोग की ओर से अलग से शिकायत दर्ज कराई गई है।

गलत आंकड़े साझा करने का आरोप

आपको बतादे संजय कुमार पर आरोप है कि उन्होंने महाराष्ट्र चुनावों से जुड़ा जो आंकड़ा सार्वजनिक किया, उसमें गंभीर गड़बड़ी थी। आईसीएसएसआर (भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद) ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएसडीएस को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। परिषद ने कहा कि अनुदान प्राप्त संस्थान के जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति का ऐसा कदम न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की साख पर भी सवाल खड़ा करता है।

संजय कुमार की सफाई

विवाद बढ़ने के बाद संजय कुमार ने ट्वीट हटाते हुए माफी मांगी। उन्होंने कहा, “हमारी टीम से आंकड़ों की तुलना में गलती हुई। विधानसभा क्षेत्र 125 (नासिक पश्चिम) और 124 के डाटा की अदला-बदली हो गई, इसी तरह हिंगणा और अन्य सीट के आंकड़ों की तुलना में भी गड़बड़ी हुई। यह त्रुटि जानबूझकर नहीं, बल्कि तकनीकी चूक थी।”
कुमार ने यह भी स्वीकार किया कि मतदाता सूची में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच कुछ असामान्य वृद्धि दिखी, लेकिन इसे मतदाता नामों के अपडेट की प्रक्रिया का हिस्सा बताया।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने संजय कुमार और सीएसडीएस पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, यही वह संस्था है, जिस पर राहुल गांधी भरोसा करते हैं। महाराष्ट्र को लेकर कांग्रेस का झूठा नैरेटिव आगे बढ़ाने के लिए बिना सत्यापन के आंकड़े जारी किए गए। माफी के बाद भी यह मामला पक्षपात का साफ संकेत देता है।

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संस्थान पर सवाल

आईसीएसएसआर ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया कि सीएसडीएस का यह कदम न केवल अनुदान शर्तों का उल्लंघन है बल्कि यह चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता को भी कमजोर करता है। परिषद ने याद दिलाया कि चुनाव आयोग दशकों से निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराता आ रहा है और इस तरह की भ्रामक जानकारी लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती है।

पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष ने मतदाता सूची में अचानक हुई वृद्धि को मुद्दा बनाया था। इसी संदर्भ में संजय कुमार का विवादित विश्लेषण सामने आया, जिसे बाद में गलती मानते हुए हटा दिया गया।