Budget 2026:- एक बड़ी खबर सामने आ रही है आपको बतादे केंद्रीय बजट 2026 को लेकर अब धीरे-धीरे तस्वीर साफ होने लगी है। और संकेत मिल रहे हैं कि केंद्र सरकार एक बार फिर से बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को अपनी विकास नीति का केंद्र बनाए रखेगी। और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक बताया जा रहा है की वित्त वर्ष 2027 में सरकारी पूंजीगत व्यय यानी कैपेक्स 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को संसद में बजट पेश करेंगी। यह माना जा रहा है कि इस बार भी सरकार की प्राथमिकता सड़कों, रेलवे, रक्षा, ऊर्जा और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों पर रहेगी।


10% तक बढ़ सकता है सरकारी निवेश

SBI की इकोरैप रिपोर्ट के अनुसार, FY27 में सरकारी कैपेक्स में करीब 10 प्रतिशत की सालाना वृद्धि देखने को मिल सकती है। वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत सरकार अपने निवेश कार्यक्रम को कमजोर नहीं करना चाहती।

विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ही देश की आर्थिक रफ्तार को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करता है। इसी वजह से सरकार लगातार पूंजीगत खर्च बढ़ा रही है।


बीते 10 सालों में चार गुना से ज्यादा बढ़ा कैपेक्स

पिछले एक दशक में सरकार के पूंजीगत खर्च में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।

  • FY16 में बजटीय कैपेक्स करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये था
  • FY26 में यह बढ़कर 11.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया

इसके अलावा, राज्यों और अन्य संस्थाओं को संपत्ति निर्माण के लिए दिए जाने वाले अनुदान में भी तेजी आई है। FY16 में जहां यह 1.3 लाख करोड़ रुपये था, वहीं FY26 में बढ़कर 4.3 लाख करोड़ रुपये हो गया।

यह भी पड़े:- अमेरिका में बड़ा विमान हादसा, उड़ान भरते समय निजी जेट क्रैश, 7 की मौत

यह आंकड़े साफ दिखाते हैं कि सरकार ने विकास को अपनी प्राथमिकता बनाए रखा है।


कुल कैपेक्स FY26 में पहुंचा 19.8 लाख करोड़ रुपये

अगर बजटीय खर्च के साथ केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (CPSEs) के निवेश को भी जोड़ा जाए, तो तस्वीर और मजबूत नजर आती है।

FY26 में CPSEs ने करीब 4.3 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश किया। इस तरह:

  • बजट खर्च
  • अनुदान
  • CPSE निवेश

को मिलाकर कुल कैपेक्स FY26 में 19.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

GDP के अनुपात में भी यह खर्च लगभग 5.5% रहा, जो भारत की “Infrastructure-led Growth” रणनीति को दर्शाता है।


उधारी और वित्तीय संतुलन पर भी नजर

बजट 2026 में सरकार की उधारी नीति पर भी बाजार की खास नजर रहेगी।

SBI रिपोर्ट के अनुसार:

  • FY27 में शुद्ध उधारी: लगभग 11.7 ट्रिलियन रुपये
  • यह राजकोषीय घाटे का करीब 70% हिस्सा हो सकता है

इसके अलावा:

  • करीब 4.60 ट्रिलियन रुपये का पुनर्भुगतान संभव
  • राज्यों की कुल उधारी: लगभग 12.6 ट्रिलियन रुपये

सरकार की कोशिश रहेगी कि विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बना रहे।


वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत का आत्मविश्वास

यह बजट एक ऐसे समय में आ रहा है जब दुनिया भर में आर्थिक अस्थिरता बनी हुई है। खासकर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक मंदी की आशंका बाजार को प्रभावित कर रही है।

हालांकि, भारत सरकार का रुख फिलहाल सकारात्मक नजर आ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार आर्थिक गति बनाए रखने के लिए सरकारी खर्च को अपना मुख्य हथियार बनाए रखेगी।


आगे क्या संकेत देता है Budget 2026?

अगर अनुमान सही साबित होते हैं और FY27 में कैपेक्स 12 लाख करोड़ रुपये के पार जाता है, तो इसका सीधा फायदा इन क्षेत्रों को मिलेगा:

  • सड़क और हाईवे
  • रेलवे नेटवर्क
  • रक्षा क्षेत्र
  • स्मार्ट सिटी
  • ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स

इससे न सिर्फ रोजगार बढ़ेगा, बल्कि निजी निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा।


निष्कर्ष

कुल मिलाकर, Budget 2026 भारत की विकास यात्रा में एक और मजबूत कदम साबित हो सकता है। लगातार बढ़ता कैपेक्स यह दिखाता है कि सरकार आर्थिक विकास को लेकर गंभीर और प्रतिबद्ध है।

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस बनाए रखना भारत को आने वाले वर्षों में एक मजबूत अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।