Strait of Hormuz:- पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के चलते Strait of Hormuz एक बार फिर वैश्विक रणनीतिक केंद्र बन गया है। इसी अहम समुद्री मार्ग से भारत के लिए पेट्रोलियम उत्पाद लेकर जा रहे दो व्यापारी जहाज गुजर रहे हैं। हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए Indian Navy ने अपने युद्धपोतों को स्टैंडबाय मोड में तैनात कर दिया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सुरक्षा दी जा सके।

होर्मुज जलडमरूमध्य का वैश्विक महत्व और बढ़ता खतरा
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस कारण यहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों और ईंधन कीमतों पर पड़ता है।
वर्तमान समय में Iran, United States और Israel के बीच बढ़ते तनाव ने इस क्षेत्र को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान अपने विरोधी देशों से जुड़े जहाजों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रख रहा है, हालांकि भारत के जहाजों को फिलहाल बिना रोक-टोक गुजरने की अनुमति दी जा रही है।
भारतीय जहाजों की आवाजाही और नौसेना की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में दो भारतीय व्यापारी जहाज सुरक्षित रूप से इस मार्ग से गुजर रहे हैं। इसके अलावा, आने वाले समय में कई और जहाजों के भी इसी रूट का उपयोग करने की संभावना है। ऐसे में भारतीय नौसेना पूरी तरह सतर्क है और अपने युद्धपोतों के जरिए इन जहाजों को सुरक्षा कवच देने के लिए तैयार है।
यह भी पड़े:- Iran–US Tension: पाकिस्तान क्यों बन रहा है मध्यस्थ? तेल, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा का पूरा
यह पहली बार नहीं है जब इस मार्ग पर भारतीय जहाजों को चुनौतियों का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले भी कई जहाज इस क्षेत्र में तनाव के चलते प्रभावित हुए हैं, लेकिन हर बार भारत ने अपने समुद्री हितों की रक्षा के लिए सक्रिय रणनीति अपनाई है।
कूटनीतिक प्रयासों से मिला समाधान और एलपीजी सप्लाई पर असर
हाल ही में पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण करीब 22 भारतीय जहाज इस क्षेत्र में फंस गए थे। Iran द्वारा मार्ग को आंशिक रूप से बाधित किए जाने के कारण तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे भारत समेत कई देशों में चिंता बढ़ गई थी।
भारत सरकार ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की और भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित कराई। इसी प्रयास का परिणाम था कि चार भारतीय जहाज—जग वसंत, पाइन गैस, शिवालिक और नंदा देवी—करीब 92 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर सफलतापूर्वक भारत पहुंच सके।
यह भी पड़े:- ईरान संकट के बीच भारत का ऊर्जा संतुलन: रूस के साथ बढ़ती नजदीकियां
होर्मुज मार्ग में बाधा आने से भारत में एलपीजी सप्लाई पर भी असर पड़ा था, क्योंकि घरेलू और व्यावसायिक उपयोग के लिए इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। हालांकि, समय पर उठाए गए कदमों और रणनीतिक प्रबंधन के चलते स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति लगातार संवेदनशील बनी हुई है। भारत अपने ऊर्जा हितों की सुरक्षा के लिए न केवल सैन्य स्तर पर सतर्क है, बल्कि कूटनीतिक प्रयासों के जरिए भी संतुलन बनाए हुए है। आने वाले समय में इस क्षेत्र की स्थिति वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और भारत की रणनीति दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
