हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : कांग्रेस वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा अभी भी जमानत से रहात नहीं मिली है आपको बता दें असम की राजनीति से जुड़े एक अहम कानूनी मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा झटका दिया है।

अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि मामला सामान्य राजनीतिक विवाद से कहीं अधिक गंभीर है। यह केस अब कानूनी और राजनीतिक दोनों ही स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
क्या है पूरा मामला?
अब समझते हैं आखिर क्या है पूरा मामला आपको बता दें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि उनके पास कई देशों के पासपोर्ट हैं और विदेशों में अघोषित संपत्तियां मौजूद हैं।
इन आरोपों के बाद रिंकी भुइयां शर्मा ने गुवाहाटी में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर खेड़ा के खिलाफ आपराधिक मामला शुरू हुआ। इस केस में धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों से जुड़े आरोप भी शामिल किए गए हैं।
हाईकोर्ट में क्या हुआ?
अब समझते हैं आखिर हाईकोर्ट में क्या हुआ आपको बता दें Gauhati High Court में इस मामले पर विस्तृत सुनवाई हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने लंबी बहस रखी। न्यायमूर्ति पार्थिव ज्योति सैकिया की एकल पीठ ने करीब तीन घंटे तक दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा और बाद में अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील Abhishek Manu Singhvi ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के देश छोड़कर भागने की कोई संभावना नहीं है और गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित हो सकता है।
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अदालत की सख्त टिप्पणी
आपको बता दें हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला केवल मानहानि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें दस्तावेजों की जालसाजी जैसे गंभीर पहलू शामिल हैं।
आपको बता दें अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि पवन खेड़ा जांच से बचने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसे में सच्चाई सामने लाने के लिए उनकी हिरासत में पूछताछ जरूरी हो सकती है। कोर्ट के अनुसार, यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि कथित फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए और इस पूरे मामले में और कौन लोग शामिल हैं।
इसके साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री की पत्नी राजनीति में सक्रिय नहीं हैं, इसलिए उन्हें सार्वजनिक विवाद में घसीटना उचित नहीं माना जा सकता।
असम सरकार का पक्ष
असम सरकार का इस मुद्दे पर क्या पक्ष रहा है आपको बता दें असम के महाधिवक्ता ने अदालत में खेड़ा को राहत देने का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह मामला साधारण मानहानि का नहीं बल्कि धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ा है।
सरकार की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि खेड़ा के देश से बाहर जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए उन्हें अग्रिम राहत देना उचित नहीं होगा।
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सुप्रीम कोर्ट और अन्य कानूनी पहलू
आपको बता दें इस मामले में पहले तेलंगाना हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा को अस्थायी राहत देते हुए ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी। हालांकि बाद में Supreme Court of India ने उस आदेश पर रोक लगा दी, जिससे उनकी कानूनी स्थिति और जटिल हो गई।
अब पूरा मामला गुवाहाटी में दर्ज एफआईआर और वहां चल रही जांच पर केंद्रित हो गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
राजीनीति की इस मुद्दे पर पर क्या क्या प्रतिक्रिया रही हैं आपको बता दें इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण वे इस विषय पर कुछ नहीं कहेंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आगे की कार्रवाई पूरी तरह पुलिस और जांच एजेंसियों पर निर्भर करेगी।
गुवाहाटी हाईकोर्ट का यह फैसला संकेत देता है कि अदालत इस मामले को गंभीरता से देख रही है और जांच प्रक्रिया को प्राथमिकता दे रही है। पवन खेड़ा के लिए यह कानूनी लड़ाई अब और कठिन हो सकती है, क्योंकि उन्हें गिरफ्तारी और पूछताछ का सामना करना पड़ सकता है।
आने वाले दिनों में इस केस की जांच और अदालत में होने वाली अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि इसका असर न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक परिदृश्य पर भी पड़ सकता है।
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