Building Collapse : दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे एक चार मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इस भयावह हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। वहीँ दूसरी और इमारत के मलबे में अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।

सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, CAT एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन टीमें मौके पर पहुंचीं। बाद में NDRF की टीम को भी राहत और बचाव अभियान में लगाया गया है।
दोपहर करीब 1:34 बजे मिली हादसे की सूचना
जानकारी के मुताबिक, आपको बता दें नानकपुरा गुरुद्वारे के पास इमारत गिरने की सूचना दोपहर करीब 1 बजकर 34 मिनट पर साउथ कैंपस पुलिस स्टेशन को PCR कॉल के जरिए मिली। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं।
आपको बता दें मौके पर पहुंची राहत टीमों ने तुरंत मलबा हटाने और उसमें फंसे लोगों की तलाश शुरू की। भारी मलबे को हटाने के लिए मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि NDRF की टीम बेहद सावधानी के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है।
कई छात्रों के मलबे में फंसे होने की आशंका
आपको बता दें जिस वक्त यह घटना घटित हुई उस समय इमारत में बड़ी संख्या में छात्र इमारत में मौजूद थे ऐसा लोगों द्वारा कहा जा रहा है। चश्मदीदों के मुताबिक, करीब 25 से 30 लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी फंसे लोगों की अंतिम संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
अब तक कम से कम तीन लोगों को मलबे से निकालकर अस्पताल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। घायलों को AIIMS ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। वहीं, उपलब्ध रिपोर्टों में कम से कम एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी होने के कारण मृतकों और घायलों की संख्या बदल सकती है।

ये भी पढ़ें : Delhi Building Collapse: सीलमपुर में चार मंजिला इमारत गिरी, दो की मौत, कई मलबे में दबे
चश्मदीद ने बताई हादसे की भयावह तस्वीर
आपको बता दें घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों ने हादसे की भयावहता के बारे में जानकारी दी। एक दुकानदार के मुताबिक, इमारत गिरने से पहले इतनी तेज आवाज हुई जैसे मानों की भूकंप आ गया हो। आवाज सुनकर लोग बाहर निकले तो पूरी इमारत मलबे में तब्दील हो चुकी थी।
इमारत गिरने के बाद पूरे इलाके में धूल और मलबे का गुबार छा गया। स्थानीय लोगों ने भी राहत एवं बचाव कार्य में मदद करने की कोशिश की। आपको बता दें चश्मदीदों के मुताबिक, मलबे के नीचे से मदद के लिए आवाजें आने की बात भी सामने आई है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद ही हो सकेगी।
रेनोवेशन और बेसमेंट निर्माण पर उठे सवाल
आपको बता दें हादसे की वजह को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। शुरुआती जानकारी और चश्मदीदों के दावों के मुताबिक, इमारत में रेनोवेशन और निर्माण कार्य चल रहा था।

बताया जा रहा है कि ग्राउंड फ्लोर पर अतिरिक्त जगह तैयार करने के साथ बेसमेंट बनाने का काम भी किया जा रहा था। आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान इमारत के निचले हिस्से के स्ट्रक्चर के साथ छेड़छाड़ की गई, जिससे इमारत कमजोर हुई।
हालांकि यह अभी जांच का विषय है। आधिकारिक जांच पूरी होने से पहले इसे हादसे का अंतिम कारण नहीं माना जा सकता।
ये भी पढ़ें : मुस्तफाबाद में बड़ा हादसा: भरभराकर गिरी चार मंजिला इमारत, चार लोगों की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
लगातार बारिश ने बढ़ाई चिंता
आपको बता दें दिल्ली में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश का दौर जारी है। ऐसे में लगातार बारिश का किसी कमजोर या निर्माणाधीन ढांचे पर क्या असर पड़ा, इसकी भी जांच की जाएगी।
हालांकि केवल बारिश को हादसे की वजह मानना जल्दबाजी होगी। जांच एजेंसियों को यह पता लगाना होगा कि इमारत की संरचनात्मक स्थिति कैसी थी, क्या वहां निर्माण कार्य की अनुमति थी और क्या निर्माण के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था।
सरकार और MCD की निगरानी व्यवस्था पर सवाल
आपको बता दें सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार और नगर निगम की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इमारत में बड़े स्तर पर निर्माण या बेसमेंट बनाने का काम चल रहा था और उसी परिसर में छात्र रह रहे थे, तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी थी या नहीं।

क्या इमारत का निरीक्षण किया गया था? क्या स्ट्रक्चरल सेफ्टी की जांच हुई थी? अगर निर्माण कार्य नियमों के खिलाफ था, तो हादसे से पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
सत्य निकेतन और आसपास का इलाका छात्रों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां बड़ी संख्या में छात्र PG और किराए के कमरों में रहते हैं। ऐसे में भवन सुरक्षा और अवैध निर्माण की निगरानी की जिम्मेदारी को लेकर प्रशासन पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ये भी पढ़ें : Nepal Flood : नेपाल में कैसे आया इतना बड़ा जलसैलाब? क्या चीन का ग्लेशियर इलाकों में बस्तियां बसाना बनी वजह, बिहार तक
हादसे के बाद गरमाई दिल्ली की राजनीति
आपको बता दें इमारत ज़मींदोज़ की घटना के बाद दिल्ली की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष ने प्रशासन और MCD की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
आम आदमी पार्टी की ओर से भी मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। वहीं दिल्ली सरकार की ओर से राहत और बचाव अभियान को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हादसे में किसी सरकारी अधिकारी की प्रत्यक्ष लापरवाही सामने आई है या नहीं। इसके लिए जांच रिपोर्ट का इंतजार करना होगा।
मृतकों के परिवारों को कितना मिलेगा मुआवजा?
अब सवाल यह है हादसे में मौतों का अंतिम आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। इसलिए पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे को लेकर भी अंतिम तस्वीर स्पष्ट नहीं है।
सत्य निकेतन हादसे के लिए दिल्ली सरकार की ओर से किसी विशेष नए मुआवजे की आधिकारिक घोषणा की पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। हालांकि दिल्ली सरकार की मौजूदा राहत व्यवस्था में विभिन्न हादसों में मृत्यु होने पर 10 लाख रुपये तक की एक्स-ग्रेशिया सहायता का प्रावधान रहा है।
हाल ही में सैदुलाजाब में हुए बिल्डिंग हादसे के मृतकों के परिवारों को भी 10-10 लाख रुपये की सहायता दी गई थी। ऐसे में अब यह देखना होगा कि सत्य निकेतन हादसे के पीड़ित परिवारों के लिए सरकार अलग से मुआवजे की घोषणा करती है या मौजूदा राहत नीति के तहत सहायता दी जाती है।
ये भी पढ़ें : Lucknow Coaching Fire: कोचिंग अग्निकांड में दर्दनाक संघर्ष, जान बचाने के लिए किसी ने लगाई छलांग तो किसी ने बाथरूम में
अब जांच से सामने आएगी हादसे की पूरी सच्चाई
फिलहाल NDRF, दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और अन्य एजेंसियां मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटी हैं। इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है।
इसके बाद जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि इमारत की संरचनात्मक स्थिति कैसी थी, निर्माण और रेनोवेशन किस तरह किया जा रहा था, बेसमेंट निर्माण की अनुमति थी या नहीं और संबंधित विभागों की ओर से सुरक्षा मानकों की निगरानी की गई थी या नहीं।
अगर जांच में बिल्डिंग मालिक, ठेकेदार या किसी अन्य व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जरूरत होगी। साथ ही अगर सरकारी स्तर पर निगरानी में चूक सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
सत्य निकेतन की यह घटना एक बार फिर दिल्ली में पुराने और कमजोर भवनों, अवैध निर्माण और PG में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब सबकी नजर रेस्क्यू ऑपरेशन और जांच के आधिकारिक नतीजों पर है।
सभी ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए JKS TV NEWS के Facebook, WhatsApp और Telegram चैनल को अभी ज़रूर जॉइन करें।
