तमिलनाडु में सियासी पेच : 4 मई को तमिलनाडु चुनाव के नतीजें सामने आए थे जिसमे TVK पार्टी को बहुमत मिली थी ऐसे में अब तमिलनाडु की राजनीति इस समय बेहद ही दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। आपको बता दें विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करने वाली तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के प्रमुख और अभिनेता-राजनेता C. Joseph Vijay ने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है।

तमिलनाडु में सियासी पेच

लेकिन बहुमत को लेकर स्थिति अब भी पूरी तरह साफ नहीं हो सकी है। आपको बता दें राज्यपाल से मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या विजय का प्रस्तावित शपथ ग्रहण समारोह टल सकता है।

सरकार बनाने के दावे पर राज्यपाल की नजर

आपको बता दें बुधवार को विजय ने तमिलनाडु के गवर्नर Rajendra Vishwanath Arlekar से मुलाकात की उन्होंने मुलाकात कर औपचारिक रूप से सरकार बनाने का दावा पेश किया। आपको बता दें TVK विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि, आपको बता दें तमिलनाडु में 234 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन आवश्यक है।

सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल ने विजय से समर्थन का स्पष्ट आंकड़ा और विधायकों की संख्या को लेकर जानकारी मांगी। लेकिन अभी तक TVK बहुमत के लिए जरूरी संख्या पूरी तरह साबित नहीं कर पाई है। यही वजह है कि राजभवन इस पूरे मामले में कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

कांग्रेस के समर्थन के बावजूद संख्या अधूरी

आपको बता दें राजनीतिक समीकरणों के बीच कांग्रेस ने TVK को समर्थन देने का ऐलान किया है। लेकिन कांग्रेस के पास केवल पांच विधायक हैं। ऐसे में विजय के समर्थन का आंकड़ा 113 तक ही पहुंचता दिखाई दे रहा है, जो बहुमत से अभी भी पांच सीट कम है।

इसी कारण राज्यपाल जल्दबाजी में कोई फैसला लेने से बच रहे हैं। आपको बता दें सूत्रों का कहना है कि राजभवन संवैधानिक विशेषज्ञों से सलाह ले रहा है कि ऐसी स्थिति में सरकार गठन का निमंत्रण दिया जाए या नहीं।

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क्या शपथ ग्रहण समारोह पर लग सकती है रोक?

आपको बता दें TVK पार्टी की ओर से 7 मई को सुबह 11:30 बजे शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने का अनुरोध किया गया था। TVK पार्टी को पूरी उम्मीद थी कि राज्यपाल जल्द ही सरकार बनाने का निमंत्रण देंगे। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अब इस समारोह पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।

आपको बता दें इस मुद्दे पर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विजय बहुमत साबित करने के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाने में सफल नहीं होते, तो शपथ ग्रहण को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है। वहीं दूसरी ओर, TVK नेतृत्व को भरोसा है कि वे फ्लोर टेस्ट से पहले आवश्यक समर्थन हासिल कर लेंगे।

विजय ने जताया बहुमत साबित करने का भरोसा

रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्यपाल से मुलाकात के दौरान विजय ने एक औपचारिक पत्र सौंपते हुए दावा किया कि उनकी TVK पार्टी तय समय सीमा के भीतर विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर देगी। इस मुलाकात को तमिलनाडु में नई सरकार गठन की दिशा में पहला बड़ा संवैधानिक कदम माना जा रहा है।

बैठक में TVK के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। इनमें ‘बुस्सी’ आनंद, केए सेंगोट्टैयन, आधव अर्जुन और अरुण राज जैसे प्रमुख नाम शामिल थे। पार्टी नेतृत्व लगातार निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों से संपर्क बनाए हुए है।

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चुनावी डेब्यू में TVK का बड़ा प्रदर्शन

आपको बता दें तमिलगा वेत्री कझगम यानि TVK ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में जबरदस्त प्रदर्शन कर तमिलनाडु की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। राजनीतिक अनुभव की कमी के बावजूद विजय की लोकप्रियता और आक्रामक चुनाव प्रचार ने पार्टी को सीधे सत्ता के करीब पहुंचा दिया।

चुनाव परिणाम आने के बाद TVK ने अपने नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई थी, जिसमें सर्वसम्मति से विजय को विधायक दल का नेता चुना गया। इसके बाद ही सरकार बनाने का दावा पेश करने की प्रक्रिया शुरू हुई।

तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ी हलचल

इस वक्त तमिलनाडु की राजनीति में हलचल देखने को मिल रही है तमिलनाडु में इस समय हर राजनीतिक दल की नजर राजभवन के अगले फैसले पर टिकी हुई है। यदि विजय को सरकार बनाने का न्योता मिलता है, तो उन्हें विधानसभा में बहुमत साबित करना होगा। वहीं यदि बहुमत को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तो राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और जोड़तोड़ की राजनीति तेज हो सकती है।

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राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले 24 घंटे तमिलनाडु की सत्ता की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

निष्कर्ष

तमिलनाडु में TVK की ऐतिहासिक जीत ने राज्य की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है, लेकिन सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने के लिए विजय को अभी बहुमत की सबसे बड़ी परीक्षा से गुजरना होगा। राज्यपाल का अगला कदम तय करेगा कि विजय जल्द मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे या फिर राज्य में राजनीतिक असमंजस और लंबा खिंच सकता है।

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