राहुल गांधी की वोट अधिकार यात्रा:- बिहार की सियासत इस महीने गर्म रहने वाली है, क्योंकि कांग्रेस सांसद और पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी 17 अगस्त से “वोट अधिकार यात्रा” की शुरुआत करने जा रहे हैं। यह यात्रा कुल 16 दिन चलेगी और राहुल गांधी इस दौरान 1,300 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करेंगे, जिसमें बिहार के लगभग 25 जिलों और 118 विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया जाएगा।

इस यात्रा को लेकर कांग्रेस का कहना है कि यह सिर्फ एक राजनीतिक अभियान नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन होगा। राहुल गांधी का मकसद लोगों को यह संदेश देना है कि यदि भारत के संविधान और लोकतंत्र को मजबूत करना है, तो मतदाता और उनके वोट के अधिकार को सबसे पहले सुरक्षित और सशक्त करना होगा।

यात्रा का महत्व और गठबंधन की रणनीति

इस यात्रा को आगामी बिहार विधानसभा चुनाव और INDIA गठबंधन की एकजुटता से भी जोड़ा जा रहा है। राहुल गांधी के साथ कई विपक्षी दलों के बड़े नेता भी मंच साझा करेंगे। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी इस यात्रा में शामिल होने की पुष्टि की है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा बिहार में विपक्ष के लिए एक बड़ा शो ऑफ स्ट्रेंथ होगी और इसका सीधा असर चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।

कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावारु ने कहा कि यह यात्रा “वोट चोरी के खिलाफ लड़ाई” को एक बड़े जन आंदोलन में बदलने का प्रयास है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में संशोधन और गड़बड़ियों के खिलाफ यह कांग्रेस का सीधा संदेश है।

यात्रा का कार्यक्रम

राहुल गांधी हर दिन अलग-अलग जिलों में आम जनता से मुलाकात करेंगे और रैलियों को संबोधित करेंगे। यात्रा का समापन 1 सितंबर को पटना के गांधी मैदान में एक बड़ी रैली के साथ होगा।

यात्रा का पूरा कार्यक्रम इस प्रकार है:

  • 17 अगस्त – रोहतास
  • 18 अगस्त – औरंगाबाद, गया
  • 19 अगस्त – नवादा, नालंदा, शेखपुरा
  • 21 अगस्त – लखीसराय, मुंगेर
  • 22 अगस्त – भागलपुर
  • 23 अगस्त – कटिहार
  • 24 अगस्त – पूर्णिया, अररिया
  • 26 अगस्त – सुपौल, मधुबनी
  • 27 अगस्त – दरभंगा, मुजफ्फरपुर
  • 28 अगस्त – सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण
  • 29 अगस्त – पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सीवान
  • 30 अगस्त – सारण, आरा
  • 1 सितंबर – पटना (समापन रैली)

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लोगों से सीधा संवाद

कांग्रेस का दावा है कि इस यात्रा के दौरान राहुल गांधी सीधे आम लोगों से संवाद करेंगे, उनकी समस्याओं को सुनेंगे और उन्हें यह भरोसा दिलाएंगे कि विपक्ष उनकी आवाज़ को संसद और सड़क, दोनों जगह उठाएगा।

राजनीतिक हलकों में इस यात्रा को राहुल गांधी की “जनता की अदालत में पेशी” के रूप में देखा जा रहा है। अब देखना होगा कि यह यात्रा बिहार की जनता के दिलों और दिमाग पर कितना असर डाल पाती है।