विदेशों में भारतीय श्रमिकों की चिंताजनक स्थिति:- यह बड़ी खबर सामने आ रही है आपको बतादे सरकारी आंकड़ों ने विदेशों में काम करने वाले भारतीय श्रमिकों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले पांच वर्षों (2021 से 2025) में कुल 37,740 भारतीयों की मौत विदेशों में दर्ज की गई है, यानी औसतन हर दिन 20 से अधिक भारतीय श्रमिक अपनी जान गंवा रहे हैं।

इनमें सबसे बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों का है, जहां लगभग 86% मौतें हुई हैं। यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि बेहतर जीवन और कमाई की उम्मीद में विदेश गए कई श्रमिकों के लिए हालात कितने कठिन हैं।
सबसे ज्यादा मौतें यूएई और सऊदी अरब में
आपको बता दें विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह द्वारा राज्यसभा में दिए गए जवाब के अनुसार, इन मौतों में सबसे अधिक मामले संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और सऊदी अरब से सामने आए हैं।
- यूएई: 12,380 मौतें
- सऊदी अरब: 11,757 मौतें
- कुवैत: 3,890 मौतें
- ओमान: 2,821 मौतें
- मलेशिया: 1,915 मौतें
- कतर: 1,760 मौतें
इसके अलावा देखा जाए तो अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर और नाइजीरिया जैसे देशों में भी भारतीय श्रमिकों बड़ी संख्या में मौत के मामले दर्ज हुए हैं।
मौतों के पीछे असली कारण क्या हैं?
इतनी मौते के पीछे के अभी तक कोई असली कारण पता नहीं चल पाया है आपको बता दें अभी तक सरकार ने कोई आधिकारिक रूप से कारणों का विस्तृत ब्यौरा साझा नहीं किया है, लेकिन कई मामलों में काम का अत्यधिक दबाव, खराब कार्य परिस्थितियाँ और स्वास्थ्य समस्याएँ प्रमुख कारण मानी जा रही हैं।
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वहीँ आपको बता दें कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक काम, तनाव और सुरक्षा मानकों की कमी भी इन घटनाओं में भूमिका निभा सकती है।
शिकायतों में भी बढ़ोतरी
आपको बता दें पिछले पांच वर्षों में भारतीय मिशनों को कुल 80,985 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जो श्रमिकों की मुश्किल परिस्थितियों को दर्शाती हैं।
- आपको जानकारी के लिए बता दें यूएई से सबसे ज्यादा 16,965 शिकायतें सामने आई हैं
- वहीँ कुवैत से 15,234 शिकायतें देखने को मिली हैं
- ओमान से 13,295 शिकायतें सामने आई हैं
- सऊदी अरब से भी 12,988 शिकायतें देखने को मिली हैं
इन शिकायतों में वेतन न मिलना, पासपोर्ट जब्त करना, ओवरटाइम का भुगतान न होना और खराब व्यवहार जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं।
ज़मीनी हकीकत: उम्मीद और संघर्ष दोनों
आपको बता दें भारत से कई श्रमिक अपनी आर्थिक स्तिथि को बेहतर करने के लिए विदेश जाते हैं, लेकिन वहां भी उन्हें कई बार कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। कुछ मामलों में कंपनियों के अचानक बंद हो जाने या कानूनी सहायता न मिलने से उनकी स्थिति और भी खराब हो जाती है।
श्रमिकों का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या समय पर वेतन न मिलना और काम के घंटों का अत्यधिक दबाव है। कई जगहों पर उन्हें छुट्टियों से भी वंचित रखा जाता है।
सरकार के प्रयास
इस मामले पर भारत सरकार का कहना है कि विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है। किसी भी संकट की स्थिति में भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर तुरंत कार्रवाई करता है।
इसके अलावा भारत ने कई देशों के साथ समझौते (MoUs) भी किए हैं ताकि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा की जा सके और उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
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