इजरायल-अमेरिका-ईरान युद्ध में बढ़ता तनाव : इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां 45 दिन के संभावित इजरायल-अमेरिका-ईरान युद्धविराम (सीज़फायर) को लेकर कूटनीतिक बातचीत चल रही है, वहीं दूसरी ओर आपको बता दें लगातार हो रहे हवाई हमलों और बढ़ती नागरिक मौतों ने भी हालात को और भी ज्याद गंभीर बना दिया है।

सीज़फायर को लेकर तेज़ हुई कूटनीतिक कोशिशें

एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थ देशों के बीच 45 दिन के अस्थायी सीज़फायर को लेकर बातचीत जारी है। आपको बता दें इस प्रक्रिया में पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश भी अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव को दो चरणों में लागू करने की योजना चल रही है। पहले चरण में 45 दिन का युद्धविराम लागू किया जाएगा, जिसके दौरान स्थायी शांति समझौते पर बातचीत होगी। अगर इस ऐसा करने से सकारात्मक प्रगति होती है, तो इस अवधि को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

बताया जा रहा है कि अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच अप्रत्यक्ष रूप से बातचीत भी जारी है, जो इस बात का संकेत है कि दोनों पक्ष समाधान की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

डेडलाइन नजदीक, हमले हुए और तेज

हालांकि युद्ध को ख़त्म करने को लेकर लगातार बातचीत जारी है, लेकिन अगर हालात देखें जाएँ तो जमीनी हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं। आपको बता दें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई समयसीमा जैसे-जैसे खत्म होने के करीब आ रही है, वैसे-वैसे अमेरिका और इजरायल के हमले ईरान के ऊपर और भी पहले से ज्याद तेज हो गए हैं।

मिली रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में तेहरान के दक्षिण-पश्चिम इलाके में एक रिहायशी इमारत पर हुए हवाई हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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तेहरान में रणनीतिक ठिकानों पर निशाना

मिली जानाकरी के मुताबिक तेहरान की प्रतिष्ठित शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी भी हमलों की चपेट में आई है। आपको बता दें यहां कई इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है, साथ ही पास स्थित गैस वितरण केंद्र भी इस हमले से बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस यूनिवर्सिटी को इजराइल द्वारा इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि इसका संबंध ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से जुड़ा बताया जाता है, जिसे ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड यानि IRGC नियंत्रित करता है।

लगातार अमेरिका-इजराइल द्वारा हो रहे हमलों के चलते ईरानी सुरक्षा बल अपने ठिकानों को बदलने पर मजबूर हो गए हैं और वैकल्पिक स्थानों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

मध्य इजरायल में ईरान के जवाबी हमले

आपको बता दें ईरान की ओर से इजराइल पर अमेरिका पर जवाबी कार्रवाई जारी है। मध्य इजरायल के कई इलाकों पर मिसाइल हमले किए गए हैं, जिनमें Petah Tikvah और Tel Aviv जैसे शहर शामिल हैं।

Petah Tikvah में इंटरसेप्टर मिसाइल के मलबे की चपेट में आने से 34 साल की एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, पूरे मध्य इजरायल में कम से कम 15 जगहों पर हमलों का असर देखा गया है।

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गाजा में बिगड़ती मानवीय स्थिति

आपको बता दें गाजा पट्टी में हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं संभल ने का नाम भी नहीं ले रहे हैं। अक्टूबर में हुए युद्धविराम के बाद से अब तक 700 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं।

आपको बता दें गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, लगभग हर दिन हमले और गोलीबारी की घटनाएं सामने आ रही हैं। हालांकि इन आंकड़ों में नागरिकों और लड़ाकों के बीच अंतर नहीं किया गया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां इन्हें काफी हद तक विश्वसनीय मानती हैं।

पृष्ठभूमि: फरवरी 2026 से शुरू हुआ था यह संघर्ष

आपको बता दें इस युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए थे।

इन हमलों का मुख्य उद्देश्य था ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना, और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को कमजोर करना और उसके नेतृत्व को निशाना बनाना था। शुरुआती हमलों में कई बड़े सैन्य अधिकारी मारे गए थे, जिससे यह संघर्ष और भड़क गया।

इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी यह संघर्ष अब एक निर्णायक मोड़ पर है। जहां एक ओर 45 दिन का संभावित सीज़फायर शांति की उम्मीद जगा रहा है, वहीं दूसरी ओर लगातार बढ़ते हमले इस उम्मीद को कमजोर भी कर रहे हैं।

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आने वाले दिनों में यह तय होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस युद्ध को रोक पाएंगे या फिर क्षेत्र में हिंसा और अस्थिरता और बढ़ेगी। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस संघर्ष पर टिकी हुई हैं।

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