Strait Of Hormuz पर गतिरोध : अमेरिका और ईरान युद्ध को चलते हुए लगभग 2 महीने से भी ज्यादा हो गए हैं लेकिन अभी भी यह युद्ध पूरी तरह से थमने का नाम नहीं ले रहा है आपको बता दें अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार दोनों को अस्त व्यस्त में डाल दिया है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य जहां से लगभग दुनिया का 20% का एक बड़ा हिस्सा तेल और गैस सप्लाई होता है

Strait Of Hormuz पर गतिरोध

इस महत्कोवपूर्ण मार्ग को लेकर जारी गतिरोध ने चिंता और बढ़ा दी है। हाल ही में ईरान ने इस अहम समुद्री रास्ते को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका के सामने तीन शर्तें रखीं, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस प्रस्ताव से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यह टकराव खत्म कैसे होगा?

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

आपको बता दें होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे अहम मार्ग माना जाता है। यह मध्य-पूर्व के तेल उत्पादक देशों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ता है। आपको बता दें यदि यह रास्ता बंद रहता है, तो पूरी दुनिया में तेल और गैस की कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसी वजह से इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित करता है।

ईरान की तीन शर्तें क्या हैं?

अब समझते हैं ईरान ने हाल ही में कूटनीतिक बातचीत के जरिए गतिरोध खत्म करने की कोशिश की है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ओमान और पाकिस्तान में हुई बैठकों के दौरान यह प्रस्ताव सामने रखा।

ईरान की ओर से रखी गई मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं:

1. आर्थिक नाकाबंदी हटाना

ईरान चाहता है कि अमेरिका उस पर लगाए गए सभी प्रतिबंध और बंदरगाहों की नाकाबंदी खत्म करे। ईरान का कहना है कि जब तक आर्थिक दबाव जारी रहेगा, तब तक कोई भी समझौता संभव नहीं है।

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2. मिडिल ईस्ट में युद्ध का अंत

ईरान ने क्षेत्र में चल रहे सैन्य संघर्ष को पूरी तरह खत्म करने की मांग की है। उसका मानना है कि स्थिरता के बिना व्यापार और कूटनीतिक बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती।

3. परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत टालना

ईरान की तीसरी और सबसे विवादित शर्त यह है कि उसके परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा को फिलहाल आगे के चरण के लिए टाल दिया जाए।

ट्रंप प्रशासन को क्यों नहीं पसंद आया प्रस्ताव?

आपको बता दें अमेरिकी पक्ष इस प्रस्ताव को लेकर सतर्क और संदेहपूर्ण नजर आ रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही साफ कर चुके हैं कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अमेरिका की प्राथमिकता है। ऐसे में यदि इस मुद्दे को टाल दिया जाता है, तो यह अमेरिकी रणनीति के खिलाफ होगा।

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इस तरह के किसी समझौते पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसा कोई भी समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नजरअंदाज किया जाए। उनके मुताबिक, यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि ईरान भविष्य में कभी भी तेजी से परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे न बढ़ सके।

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बातचीत में क्यों आ रही है रुकावट?

आपको बता दें दोनों देशों के बीच अविश्वास इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह है जिस कारण से यह युद्ध ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा है। जहां ईरान आर्थिक राहत और क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है, वहीं अमेरिका सुरक्षा और परमाणु खतरे को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है।

हालांकि, अमेरिका की ओर से यह संकेत भी दिया गया है कि बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि वह मीडिया के जरिए नहीं, बल्कि सीधे कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से ही बातचीत करेगा।

वैश्विक असर: तेल और गैस बाजार पर संकट

इस टकराव का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। खासकर ऊर्जा आयात करने वाले देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन सकती है।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी यह गतिरोध फिलहाल सुलझता नजर नहीं आ रहा है। ईरान की शर्तें और अमेरिका की प्राथमिकताएं एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहीं, जिससे समझौते की राह मुश्किल हो गई है। जब तक दोनों पक्ष अपने-अपने रुख में लचीलापन नहीं दिखाते, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा और उससे जुड़ा वैश्विक ऊर्जा संकट बना रह सकता है।

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