शायद ही अपने कभी ऐसा वाकया कभी सुना होगा की एक माँ ने अपने ही बच्चे को नाले में फेक दिया यह दर्दनाक मामला हरियाणा के फरीदाबाद से सामने आया है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। एक मासूम बच्ची की मौत के पीछे जो सच्चाई सामने आई, वह बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली है।

आपको बता दें शुरुआती जांच में यह मामला सामान्य हादसा लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे पुलिस ने तह तक पहुंचने की कोशिश की, एक भयावह सच सामने आया—जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया।
नाले में मिला मासूम का शव, इलाके में मचा हड़कंप
आपको बता दें यह घटना फरीदाबाद के पल्ला थाना क्षेत्र की है, जहां धीरज नगर और टीटू कॉलोनी पार्ट-2 के बीच बहने वाले एक नाले में करीब 18 महीने की बच्ची का शव बरामद हुआ। वहाँ के स्थानीय लोगों द्वारा ‘बुढ़िया नाला’ कहे जाने वाले इस स्थान पर बच्ची का शव लोहे के जाल में फंसा हुआ मिला था।
सबसे पहले इस शव को दो स्कूली बच्चों ने देखा, जिन्होंने तुरंत आसपास के लोगों को इसकी सूचना दी। इसके बाद पुलिस को बुलाया गया और शव को तुरंत कब्जे में लेकर गंभीर जांच शुरू की गई।
CCTV फुटेज बना जांच का अहम सुराग
आपको बता दें इस घटना का सबसे बड़ा जाँच का केंद्र बना CCTV जांच के दौरान पुलिस को एक महत्वपूर्ण CCTV फुटेज मिला, जिसने पूरे मामले की दिशा को ही बदल दीया। CCTV में साफ देख सकते हैं कैसे एक महिला बच्ची को गोद में लेकर जाती हुई नजर आई, लेकिन कुछ देर बाद वही महिला अकेले लौटती दिखाई दी।
इस संदेह के आधार पर पुलिस ने महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ की। आपको बता दें शुरुआती पूछताछ में महिला ने गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती से पूछताछ करने पर उसने अपना अपराध कबूल कर लिया।
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मां ने ही किया दिल दहला देने वाला कृत्य
आपको बता दें पुलिस पूछताछ में जो सच सामने आया, वह बेहद चौंकाने वाला था। बच्ची को किसी और ने नहीं, बल्कि उसकी अपनी मां ने ही जिंदा नाले में फेंका था। नाले के गंदे पानी में डूबने के कारण 18 महीने की मासूम की मौत हो गई।
पुलिस के अनुसार, बच्ची परिवार की छठी संतान थी। उससे पहले परिवार में पांच बेटियां और हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि परिवार गंभीर आर्थिक तंगी से जूझ रहा था, जो इस अमानवीय कदम की एक बड़ी वजह हो सकती है।
आर्थिक तंगी और सामाजिक दबाव बना कारण?
मासूम बच्ची की मौत का आर्थिक और सामाजिक दबाव बना कारण आपको बता दें सूत्रों के मुताबिक, बच्ची के माता-पिता धीरज नगर की झुग्गी में रहते हैं और उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब है उनके पास रोज़गार नहीं था। लगातार बेटियों के जन्म और सीमित संसाधनों के चलते परिवार पर बहुत भारी दबाव था।
हालांकि, पुलिस इस मामले के सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस अपराध के पीछे केवल आर्थिक कारण थे या कोई अन्य सामाजिक या मानसिक पहलू भी जिम्मेदार है।
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पुलिस जांच जारी, जल्द आएगा आधिकारिक बयान
फिलहाल, क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस की टीम इस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस मामले में विस्तृत आधिकारिक बयान जारी किया जाएगा और आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी जिससे ऐसी घटना को दुबारा से अंजाम न दिया जा सकें।
फरीदाबाद की यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि समाज के सामने कई गंभीर सवाल भी खड़े करती है—क्या आज भी बेटियों को बोझ समझा जाता है? क्या आर्थिक तंगी इंसान को इतना मजबूर कर सकती है कि वह अपनी ही संतान की जान ले ले?
यह मामला न सिर्फ कानून व्यवस्था, बल्कि सामाजिक सोच और जागरूकता की भी गहरी पड़ताल की मांग करता है।
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