इस वक्त भोजशाला मामला सुर्ख़ियों में चल रहा है आपको बता दें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के भोजशाला मामले में आए फैसले के बाद धार सहित पूरे प्रदेश में हिंदू समाज के बीच खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिला।

आपको बता दें एक बेहद लंबे समय से चल रहे विवाद और कानूनी लड़ाई के बाद अब वाग्देवी मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना का मार्ग खुलता नजर आ रहा है। फैसले के बाद भोजशाला परिसर में पहुंचे आंदोलनकारी और श्रद्धालु भावुक हो उठे। कई लोगों ने इसे केवल कानूनी जीत नहीं, बल्कि पीढ़ियों के संघर्ष का परिणाम बताया।
आंदोलनकारियों ने याद किए संघर्ष के दिन
आपको बता दें भोजशाला आंदोलन से जुड़े कई लोगों ने कहा कि इस लड़ाई में कई परिवारों ने दशकों तक संघर्ष किया। वहीँ कुछ आंदोलनकारियों का कहना है कि इस मुद्दे ने केवल धार्मिक नहीं बल्कि भावनात्मक रूप भी ले लिया था। वर्षों तक इस चले आंदोलन के दौरान कई लोगों ने अपनी जवानी इस संघर्ष को समर्पित कर दी, जबकि कुछ लोगों ने अपनी जान तक गंवा दी।
आंदोलन से जुड़े लोगों का मानना है कि यह फैसला उन सभी लोगों की तपस्या और त्याग का परिणाम है, जिन्होंने लगातार भोजशाला को मंदिर के रूप में स्थापित करने के लिए आवाज उठाई।
“दो-तीन पीढ़ियों का संघर्ष अब पूरा हुआ”
आपको बता दें हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने कहा कि भोजशाला को लेकर संघर्ष कोई नया नहीं था। यह लड़ाई कई पीढ़ियों से चली आ रही थी। आंदोलनकारियों के अनुसार, वर्षों तक धरना, प्रदर्शन और सत्याग्रह के माध्यम से इस मुद्दे को जीवित रखा गया।
कई वरिष्ठ आंदोलनकारियों ने कहा कि अब उनका अगला लक्ष्य भोजशाला को “सरस्वती लोक” के रूप में विकसित करना है, ताकि इसे भारतीय संस्कृति और ज्ञान की पहचान के रूप में स्थापित किया जा सके।
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आंदोलन में जान गंवाने वालों को दी गई श्रद्धांजलि
अब आपको बता दें भोज उत्सव समिति के सदस्य राजेश शुक्ला ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक क्षण बताया। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सदियों के इंतजार के बाद आज ऐसा समय आया है जब श्रद्धालु बिना किसी बड़ी बाधा के देवी वाग्देवी की पूजा कर पा रहे हैं।
उन्होंने इस आंदोलन के दौरान अपनी जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि भी दी। राजेश शुक्ला ने कहा कि फिलहाल प्रतीकात्मक रूप से पूजा हो रही है, लेकिन उन्हें उस दिन का इंतजार है जब मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा विदेश से वापस लाकर भोजशाला में स्थापित की जाएगी।
“भोजशाला का हर पत्थर मंदिर होने का प्रमाण देता है”
आपको बता दें हिंदू नेता अशोक जैन ने फैसले साफ़ तौर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भोजशाला परिसर में मौजूद शिलालेख, स्थापत्य कला और खंडित मूर्तियां इस बात के प्रमाण हैं कि यह स्थान प्राचीन मंदिर रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को शुरू से भरोसा था कि न्याय अंततः उनके पक्ष में आएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष के दौरान कई बार प्रशासन और सरकार के विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन आंदोलनकारियों ने पीछे हटने के बजाय अपने अभियान को जारी रखा। उनके अनुसार, यह केवल संपत्ति का नहीं बल्कि आस्था और धार्मिक अधिकारों का प्रश्न था।
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90 वर्षीय आंदोलनकारी ने सुनाई संघर्ष की कहानी
आपको बता दें करीब 90 वर्ष के वरिष्ठ हिंदू नेता विमल गोधा ने कहा कि भोजशाला आंदोलन उनके जीवन का बड़ा हिस्सा रहा है। उन्होंने बताया कि इस संघर्ष के दौरान कई बार सड़कों पर उतरना पड़ा, विरोध प्रदर्शन हुए और लाठियां भी खानी पड़ीं, लेकिन आंदोलन कभी रुका नहीं।
उन्होंने यहाँ तक कहा कि हिंदू समाज की मांग तब तक जारी रहेगी जब तक उन्हें भोजशाला पर पूर्ण अधिकार स्थापित नहीं हो जाता। उनके अनुसार, यह केवल वर्तमान पीढ़ी की नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों की आस्था से जुड़ा विषय है।
मंगलवार को फिर होगा सत्याग्रह
आपको बता दें भोजशाला आंदोलन के सक्रिय कार्यकर्ता गोपाल शर्मा ने कहा कि कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक जीत है, लेकिन आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्षों से हर मंगलवार को पूजा और सत्याग्रह के माध्यम से हिंदू समाज अपनी मांग रखता आया है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इस वर्ष वसंत पंचमी के अवसर पर अखंड पूजा की अनुमति मिलना आंदोलन की पहली बड़ी सफलता थी। अब आने वाले मंगलवार को भी श्रद्धालु भोजशाला में सत्याग्रह और पूजा कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
क्या है भोजशाला विवाद?
दरअसल आपको बता दें धार स्थित भोजशाला लंबे समय से धार्मिक और ऐतिहासिक विवाद का केंद्र रही है। हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है। इसी विवाद को लेकर वर्षों से अदालतों में सुनवाई और प्रशासनिक व्यवस्थाएं चलती रही हैं।
भोजशाला का इतिहास राजा भोज के समय से जुड़ा माना जाता है और इसे भारतीय शिक्षा, संस्कृति और संस्कृत अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र भी बताया जाता है।
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बता दें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले ने भोजशाला विवाद को लेकर एक नया अध्याय खोल दिया है। हिंदू समाज इसे अपनी आस्था और लंबे संघर्ष की जीत मान रहा है। वहीं आंदोलनकारियों का कहना है कि यह फैसला केवल कानूनी नहीं बल्कि भावनात्मक और सांस्कृतिक महत्व भी रखता है। आने वाले समय में भोजशाला को लेकर प्रशासनिक और धार्मिक गतिविधियां किस दिशा में आगे बढ़ती हैं, इस पर पूरे देश की नजर बनी रहेगी।
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