पंजाब की सियासत में बड़ा टकराव : कुछ दिनों पहले पंजाब के सभी प्रमुख सांसदों ने अपने पद से इस्तीफा दिया था अब आपको बता दें पंजाब की राजनीति में चल रहा विवाद अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है।

आम आदमी पार्टी (AAP) से अलग हुए 7 सांसदों और राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच टकराव अब सीधे देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था तक पहुंच चुका है। दोनों पक्ष 5 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अलग-अलग समय पर मुलाकात कर अपनी-अपनी बात रखेंगे।

राज्य की राजनीति से निकलकर राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा मामला

आपको बता दें पंजाब में शुरू हुआ यह राजनीतिक विवाद अब केवल पार्टी के भीतर या विधानसभा तक सीमित नहीं रह गया है। आपको पता ही है की AAP से अलग होकर सात सांसदों ने पार्टी छोड़ने के बाद भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है, जिसके बाद सियासी माहौल और अधिक गरमा गया है।

आपको बता दें सूत्रों के अनुसार, ये सभी सांसद 5 मई की सुबह राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप लगाने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि राज्य सरकार राजनीतिक बदले की भावना से सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर रही है और उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

इस कदम से साफ है कि मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच चुका है और संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग की जा रही है।

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मुख्यमंत्री भगवंत मान भी रखेंगे अपना पक्ष

दूसरी ओर आपको बता दें, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रपति से मिलने की इच्छा जताई थी। हालांकि उन्होंने अपने विधायकों के साथ मिलने का अनुरोध किया था, लेकिन उन्हें अकेले मिलने की अनुमति दी गई है।

उनकी मुलाकात राष्ट्रपति से दोपहर 12 बजे तय की गई है। माना जा रहा है कि इस दौरान वह राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए विपक्ष और बागी नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देंगे।

एक ही दिन राष्ट्रपति से दोनों पक्षों की मुलाकात यह दर्शाती है कि मामला कितना गंभीर और संवेदनशील हो चुका है।

संदीप पाठक ने FIR की खबरों पर दी सफाई

वहीं इस पूरे घटनाक्रम के बीच AAP के प्रमुख नेता Sandeep Pathak ने पहली बार मीडिया के सामने आकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उनके खिलाफ दर्ज कथित FIR को लेकर चल रही खबरों पर उन्होंने कहा कि उन्हें अब तक किसी भी तरह की आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि मीडिया में चल रही खबरों के बावजूद उन्हें किसी भी FIR की सूचना नहीं दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक उन्हें आधिकारिक जानकारी नहीं मिलती, तब तक वह इस विषय पर कोई ठोस टिप्पणी नहीं कर सकते।

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पार्टी छोड़ने के फैसले पर क्या बोले पाठक

आपको बता दें संदीप पाठक ने भी पार्टी छोड़ने के अपने फैसले को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा सिद्धांत और विचारधारा के आधार पर राजनीति की है और आगे भी उसी मार्ग पर चलेंगे।

उनका कहना है कि AAP छोड़ना कोई व्यक्तिगत निर्णय नहीं था, बल्कि यह उनके राजनीतिक विचारों और दिशा में बदलाव का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में कदम रखना आसान नहीं होता, लेकिन अब जब वह इस रास्ते पर हैं तो उन्हें अपने फैसले पर भरोसा है।

आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है सियासी गर्मी

आपको बता दें चल रही इन घटनाओं से साफ संकेत मिल रहे हैं कि पंजाब की राजनीति आने वाले समय में और अधिक उथल-पुथल देख सकती है। सात सांसदों का पार्टी छोड़ना और सीधे राष्ट्रपति से शिकायत करना इस बात का संकेत है कि राजनीतिक संघर्ष अब और गहराता जा रहा है।

पंजाब में जारी यह राजनीतिक टकराव अब एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। 5 मई को राष्ट्रपति से होने वाली मुलाकातें इस पूरे मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस संवैधानिक हस्तक्षेप के बाद स्थिति में सुधार होता है या विवाद और गहराता है।

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