बहुत जल्द ही उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ एक नई और आधुनिक विधानसभा इमारत का गवाह बनने जा रही है। आपको बता दें गोमती नगर स्थित सहारा शहर की करीब 245 एकड़ जमीन पर बनने वाले इस विशाल विधानसभा परिसर की प्रक्रिया अब तेज हो गई है।

वहीँ लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने इसके डिजाइन और मास्टर प्लान के लिए टेंडर भी जारी कर दिया है। केंद्र सरकार का उद्देश्य आने वाले वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐसा विधानभवन तैयार करना है, जो आधुनिक तकनीक, सुरक्षा और बढ़ती विधायकों की संख्या के अनुरूप हो।

गोमती नगर में बनेगा नया विधानसभा परिसर

आपको बता दें नई विधानसभा लखनऊ के पॉश इलाके गोमती नगर के विपुल खंड स्थित सहारा शहर की जमीन पर बनाई जाएगी। यह जमीन पहले सहारा समूह को लीज पर दी गई थी, लेकिन नियमों के उल्लंघन के बाद इसे वापस सरकारी कब्जे में ले लिया गया। अब इसी विशाल क्षेत्र को उत्तर प्रदेश के नए प्रशासनिक और राजनीतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।

आपको बता दें एलडीए द्वारा जारी आरएफपी (Request for Proposal) के अनुसार, आर्किटेक्ट और कंसल्टेंट कंपनियां 23 मई से 21 जून तक आवेदन कर सकेंगी। चयनित एजेंसी पूरे प्रोजेक्ट की डीपीआर (Detailed Project Report) तैयार करेगी, जिसके आधार पर निर्माण लागत और समयसीमा तय होगी।

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शुरुआती बजट में 100 करोड़ का प्रावधान

नई विधानसभा बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इस परियोजना के लिए शुरुआती तौर पर 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। हालांकि यह केवल प्रारंभिक डिजाइन और प्लानिंग के लिए टोकन अमाउंट माना जा रहा है। अनुमान है कि पूरे विधानसभा परिसर, सचिवालय, पार्किंग, डिजिटल सुविधाओं और सुरक्षा ढांचे सहित कुल परियोजना पर कई सौ करोड़ रुपये खर्च होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट केवल एक नई इमारत नहीं होगा, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया प्रशासनिक हब होगा।

2029-30 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य

इस नए विधानसभा का निर्माण कार्य आखिर कब तक का रखा गया है आपको बता दें सरकार इस प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाना चाहती है। प्रशासनिक स्तर पर कोशिश की जा रही है कि निर्माण कार्य जल्द शुरू हो सके। माना जा रहा है कि 2026 के बाद संभावित परिसीमन (Delimitation) के चलते उत्तर प्रदेश में विधानसभा सीटों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है। वर्तमान में राज्य में 403 विधायक हैं, लेकिन भविष्य में यह संख्या और अधिक हो सकती है।

इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए नई विधानसभा को बड़े स्तर पर डिजाइन किया जा रहा है ताकि भविष्य में अतिरिक्त सदस्यों के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध हो। सरकार का लक्ष्य है कि यह पूरा प्रोजेक्ट 2029-30 तक तैयार हो जाए।

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102 साल पुरानी है मौजूदा विधानसभा

आपको बता दें लखनऊ के हजरतगंज स्थित मौजूदा विधानसभा भवन का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। इस ऐतिहासिक इमारत की आधारशिला 15 दिसंबर 1922 को तत्कालीन संयुक्त प्रांत के गवर्नर सर स्पेंसर हरकोर्ट बटलर ने रखी थी। करीब छह वर्षों के निर्माण कार्य के बाद इसका उद्घाटन 21 फरवरी 1928 को किया गया था। उस दौर में इसे “काउंसिल हाउस” के नाम से जाना जाता था।

दिलचस्प बात यह है कि उस समय इस भव्य भवन के निर्माण पर करीब 21 लाख रुपये की लागत आई थी, जो आज के समय में ऐतिहासिक महत्व रखती है। भवन का डिजाइन प्रसिद्ध आर्किटेक्ट सर स्विंटन जैकब और हीरा सिंह ने तैयार किया था।

वास्तुकला का अद्भुत नमूना है पुराना विधान भवन

आपको बता दें पुरानी विधानसभा इमारत अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। इसे मिर्जापुर से लाए गए चुनार के बलुआ पत्थरों से बनाया गया था। भवन का सबसे आकर्षक हिस्सा इसका विशाल अष्टकोणीय गुंबद है, जिसमें भारतीय और रोमन शैली की नक्काशी देखने को मिलती है।

इमारत की छतों और दीवारों पर बनी जालियां, पच्चीकारी और कलात्मक डिजाइन उस दौर की शिल्पकला का शानदार उदाहरण मानी जाती हैं। इस विधानसभा को बेहद आकर्षित बनाने के लिए वाराणसी के कारीगरों ने इसमें विशेष नक्काशी का काम किया था, जो आज भी लोगों को आकर्षित करता है।

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नई विधानसभा की जरूरत क्यों पड़ी?

अब आता है सबसे ज़रूरी सवाल आखिर इस विधानसभा की ज़रुरत क्यों पड़ी जब पहले सी एक विधानसभा मौजूद है आपको बता दें मौजूदा विधानसभा भवन अब 102 साल पुराना हो चुका है। समय के साथ प्रशासनिक जरूरतें बदल गई हैं। डिजिटल विधानसभा प्रणाली, हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था, आधुनिक संचार तकनीक और भविष्य में बढ़ने वाली विधायक संख्या को देखते हुए पुरानी इमारत अब सीमित साबित हो रही है।

इसके अलावा भूकंपरोधी तकनीक, स्मार्ट मीटिंग हॉल, डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम और आधुनिक पार्किंग जैसी सुविधाओं की भी आवश्यकता महसूस की जा रही थी। यही वजह है कि सरकार एक नई और अत्याधुनिक विधानसभा बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए बड़ा बदलाव

आपको बता दें विशेषज्ञों के अनुसार, नई विधानसभा केवल एक प्रशासनिक भवन नहीं होगी, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव का प्रतीक बनेगी। आधुनिक सुविधाओं से लैस यह परिसर भविष्य की जरूरतों के हिसाब से विकसित किया जाएगा, जिससे शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जा सके।

साथ ही, पुरानी विधानसभा इमारत को धरोहर के रूप में संरक्षित रखने की भी योजना है ताकि उसका ऐतिहासिक महत्व बना रहे।

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